Category : InternationalPublished on: February 28 2026
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भारत और जर्मनी ने नई दिल्ली में आयोजित उच्च-स्तरीय क्लाइमेट टॉक के दौरान जलवायु अनुकूलन और लचीलापन बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वार्ता में पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दृष्टिकोण और भारत की आगामी राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (NAP) के समर्थन पर जोर दिया गया। Jochen Flasbarth ने International Climate Initiative के अंतर्गत एक नई “लार्ज ग्रांट” परियोजना की घोषणा की, जिसके तहत भारत को 20 मिलियन यूरो तक की सहायता दी जाएगी।
यह परियोजना हिमालय, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर क्षेत्र, द्वीपीय प्रदेशों और निचले गंगीय मैदानों जैसे उच्च जोखिम वाले पारिस्थितिकी तंत्रों में लचीलापन बढ़ाएगी। इसके अंतर्गत वन पुनर्स्थापन, जैव विविधता गलियारे, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और सामुदायिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही ब्लेंडेड फाइनेंस, बायोडायवर्सिटी क्रेडिट और बीमा-आधारित जोखिम समाधान जैसे नवाचारी वित्तीय उपायों का भी अन्वेषण किया जाएगा।
भारत की राष्ट्रीय अनुकूलन योजना, जिसे Ministry of Environment, Forest and Climate Change द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है, विकास योजना में जलवायु लचीलापन को एकीकृत करने का लक्ष्य रखती है।