एक समरूप कृषि-जलवायु क्षेत्र में उनकी कार्यप्रणाली। भारत ने दोहा हमले की निंदा क्यों की?

एक समरूप कृषि-जलवायु क्षेत्र में उनकी कार्यप्रणाली। भारत ने दोहा हमले की निंदा क्यों की?

Static GK   /   एक समरूप कृषि-जलवायु क्षेत्र में उनकी कार्यप्रणाली। भारत ने दोहा हमले की निंदा क्यों की?

Change Language English Hindi

द हिंदू: 19 सितंबर 2025 को प्रकाशित।

 

समाचार में क्यों:

भारत ने इज़राइल के दोहा पर हमले को “कतर की संप्रभुता का उल्लंघन” बताते हुए “स्पष्ट निंदा” की। यह इसलिए अहम है क्योंकि अब तक भारत ने इज़राइल के अन्य देशों पर हमलों के लिए इतनी कड़ी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था।

 

पृष्ठभूमि:

9 सितंबर को इज़राइली हमले ने दोहा में हमास नेताओं की बैठक को निशाना बनाया। कई लोग मारे गए और घायल हुए। कतर ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला कहा। भारत ने न केवल इस हमले की निंदा की बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने क़तरी अमीर से फ़ोन पर बात कर “एकजुटता” भी जताई।

 

मुख्य मुद्दे:

संप्रभुता और नज़ीर (precedent): किसी खाड़ी देश की राजधानी पर हमला पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल उठाता है।

खाड़ी सुरक्षा ढांचा: इससे खाड़ी देशों में साझा रक्षा व्यवस्था की ज़रूरत पर ज़ोर बढ़ा।

महाशक्तियों की भूमिका: अमेरिका पर सुरक्षा गारंटर के तौर पर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

 

भारत की पिछली प्रतिक्रियाओं से अंतर:

पहले भारत या तो “चिंता” जताता था या चुप रहता था (जैसे लेबनान, सीरिया, ईरान पर इज़राइल के हमलों के समय)। लेकिन दोहा पर हमले पर भारत ने स्पष्ट रूप से संप्रभुता का उल्लंघन कहा और “अस्पष्ट निंदा” (unequivocal condemnation) की। यह भाषा पहले के बयानों से कहीं अधिक कठोर है।

 

कतर को अलग तरीके से क्यों देखा गया:

भारतीय प्रवासी: कतर में बड़ी भारतीय आबादी है, जिनकी सुरक्षा सीधा भारत का हित है।

उच्च-स्तरीय रिश्ते: प्रधानमंत्री मोदी और क़तरी अमीर के व्यक्तिगत रिश्ते अहम हैं।

ऊर्जा आपूर्ति: कतर भारत का बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है।

क्षेत्रीय संकेत: हमले ने खाड़ी देशों को “चेतावनी” दी कि वे भी निशाने पर हो सकते हैं, जिससे भारत को तत्काल प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

 

भारत–कतर संबंधों की भूमिका:

भारत की प्रतिक्रिया इस तथ्य से तय हुई कि कतर भारत के लिए ऊर्जा, प्रवासी समुदाय और उच्च-स्तरीय राजनीतिक रिश्तों में महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत ने कड़े शब्दों में निंदा की, जबकि अन्य जगहों पर उतना सक्रिय नहीं रहा।

 

गाज़ा पर भारत की चुप्पी क्यों:

रणनीतिक संतुलन: भारत एक ओर इज़राइल के साथ रक्षा व तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है, दूसरी ओर खाड़ी देशों से ऊर्जा और मज़दूर बल पर निर्भर है।

राजनयिक गणित: किसी एक पक्ष पर खुला झुकाव दोनों रिश्तों को नुकसान पहुँचा सकता है।

वास्तविक कारण: गाज़ा या ईरान पर हमले भारत के प्रत्यक्ष द्विपक्षीय हितों से कम जुड़े थे। लेकिन दोहा (कतर) पर हमला सीधे भारत के हितों से जुड़ा है।

 

भारत की पश्चिम एशिया नीति पर प्रभाव:

व्यावहारिक, लेन-देन आधारित कूटनीति जारी रहेगी, लेकिन भारत खाड़ी की सुरक्षा संवेदनशीलताओं को ज्यादा ध्यान में रखेगा।

खाड़ी सुरक्षा ढांचे पर ध्यान: सऊदी–पाकिस्तान रक्षा समझौते और GCC की संयुक्त रक्षा योजना भारत को नई कूटनीतिक चुनौतियाँ देंगे।

मूल्यों से अधिक व्यावहारिकता: दोहा पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया सिद्धांतगत बदलाव नहीं बल्कि व्यावहारिक हितों का संकेत है।

जटिल संतुलन: यदि इज़राइल–गाज़ा युद्ध खाड़ी की और राजधानियों तक फैला, तो भारत के लिए इज़राइल और खाड़ी दोनों के बीच संतुलन साधना और मुश्किल होगा।

 

निष्कर्ष:

भारत का दोहा बयान ज्यादा स्पष्ट और सख्त है, लेकिन इसका कारण व्यावहारिक और द्विपक्षीय हित (कतर से ऊर्जा, प्रवासी समुदाय, उच्च-स्तरीय रिश्ते, क्षेत्रीय सुरक्षा) हैं, न कि पूरी तरह से कोई नया सिद्धांत-आधारित रुख। गाज़ा पर भारत की चुप्पी और इज़राइल पर करीबी रिश्ता जारी है, पर खाड़ी की सुरक्षा वास्तविकताओं को देखते हुए भारत अब अपने बयानों और नीतियों में ज्यादा संवेदनशील और संतुलित रुख अपनाने को मजबूर होगा।

Other Post's
  • भारत का पोषण मिशन विस्तारित हुआ, फिर भी कुछ कमियां बनी हुई हैं।

    Read More
  • हरियाणा के शहरों के उपनाम

    Read More
  • नदियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई दिवस 2023

    Read More
  • क्या ट्रम्प के परमाणु हथियारों के परीक्षण के अचानक आदेश से वैश्विक तनाव बढ़ेगा?

    Read More
  • क्या वैवाहिक जीवन में व्यवधान के लिए कोई तीसरा पक्ष उत्तरदायी हो सकता है?

    Read More