RBI का अधिशेष कहां से आता है?

RBI का अधिशेष कहां से आता है?

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द हिंदू: 25 मई 2025 को प्रकाशित:

 

समाचार में क्यों? 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2024–25 के लिए केंद्र सरकार को ₹2.69 लाख करोड़ का अधिशेष हस्तांतरित करने की घोषणा की — जो कि एक रिकॉर्ड है और पिछली बार के ₹2.11 लाख करोड़ से भी अधिक है।

 

पृष्ठभूमि:

RBI अपनी विभिन्न गतिविधियों से मुनाफा कमाता है:

सीनियोरेज (Seigniorage) – मुद्रा छापने से प्राप्त लाभ,

सरकार और बैंकों को दिए गए ऋण पर ब्याज,

विदेशी निवेश पर ब्याज और विनिमय दर से लाभ।

 

RBI अधिनियम, 1934 की धारा 47 के अनुसार, सभी खर्चों और प्रावधानों के बाद बचा हुआ लाभ केंद्र सरकार को दिया जाता है।

 

RBI पैसा कैसे कमाता है?

Seigniorage: मुद्रा की कीमत और निर्माण लागत के बीच का अंतर।

ब्याज आय: बैंकों और सरकार को दिए गए ऋण पर।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ: विदेशी बॉन्ड/डॉलर में निवेश से आय।

तरलता प्रबंधन उपकरण: रेपो/रिवर्स रेपो से ब्याज आय।

 

यह डिविडेंड क्यों नहीं है?

RBI कोई कंपनी नहीं है और उसके कोई शेयरधारक नहीं हैं।

यह अधिशेष कानूनी रूप से अनिवार्य स्थानांतरण है, न कि मुनाफे का वितरण जैसा कि कंपनियों में होता है।

 

Contingent Risk Buffer (CRB) क्या है?

CRB एक सुरक्षा भंडार (buffer) होता है, जो आर्थिक या वित्तीय संकट की स्थिति में उपयोग के लिए रखा जाता है।

बिमल जालान समिति (2019) ने 5.5%–6.5% के बीच CRB रखने की सिफारिश की थी।

2024–25 में RBI ने इस सीमा को बढ़ाकर 4.5%–7.5% कर दिया और वर्तमान में इसे 7.5% रखा गया है।

 

रिकॉर्ड अधिशेष स्थानांतरण के कारण:

विदेशी मुद्रा की अधिक बिक्री से लाभ।

विदेशी परिसंपत्तियों से उच्च आय।

CRB सीमा में लचीलापन, जिससे अधिक अधिशेष स्थानांतरित किया जा सका।

उच्च provisioning के बावजूद मुनाफा पर्याप्त था।

 

बजट बनाम वास्तविकता:

बजट अनुमान: ₹2.56 लाख करोड़ (RBI + PSU बैंकों से)

केवल RBI से: ₹2.69 लाख करोड़ — बजट से अधिक

इस क्षेत्र से कुल प्राप्तियाँ अब बजटीय अनुमान से कहीं अधिक होंगी।

 

क्या यह पहले विवाद का कारण रहा है?

2018 में सरकार और RBI के बीच अधिशेष को लेकर खींचतान हुई थी।

उप-गवर्नर विरल आचार्य ने RBI की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए थे।

पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने इसी मुद्दे पर इस्तीफा दिया था।

तत्कालीन वित्त सचिव ने बताया कि PM मोदी ने RBI को "साँप जो खजाने पर बैठा है" कहा था।

मामला तब शांत हुआ जब जालान समिति का फॉर्मूला अपनाया गया।

 

क्या ऐसे बड़े ट्रांसफर अब सामान्य बन जाएंगे?

जरूरी नहीं। इस वर्ष के अधिशेष में विदेशी मुद्रा लाभ बड़ी भूमिका में था, जो हर साल नहीं हो सकता।

लेकिन CRB की नई विस्तृत सीमा के कारण भविष्य में लचीलापन बना रहेगा।

 

मुख्य निष्कर्ष:

RBI का यह रिकॉर्ड अधिशेष स्थानांतरण दर्शाता है कि उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत है और वह सरकार की वित्तीय आवश्यकताओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। लेकिन यह भी ज़रूरी है कि संस्थागत स्वतंत्रता और जोखिम प्रबंधन को संतुलित रखा जाए।

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