Source: The Hindu| Date: March 19, 2026
इस पर चर्चा क्यों हो रही है?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने ट्रम्प प्रशासन के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वैच्छिक स्व-निर्वासन के लिए "एग्जिट बोनस" को $1,000 से बढ़ाकर $2,600 कर दिया है। गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोम ने यह घोषणा की। भारत के लिए यह विशेष रूप से चर्चित इसलिए हुआ क्योंकि DHS ने "भारत के लिए निःशुल्क उड़ान" शीर्षक वाले पोस्टर में ताज महल की छवि का उपयोग किया — जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक है।
यह कदम ट्रम्प प्रशासन के व्यापक स्व-निर्वासन अभियान का हिस्सा है जिसमें CBP Home Mobile App का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से अवैध प्रवासी ICE की कार्रवाई, हिरासत और जबरन निर्वासन से बचने के लिए स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने की सूचना दे सकते हैं।

भारत क्यों निशाने पर है?
भारत का इस अभियान में शामिल होना कोई संयोग नहीं है। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, अमेरिका में लगभग 7,25,000 भारतीय नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं, जिससे वे मैक्सिको और अल सल्वाडोर के बाद तीसरे सबसे बड़े अनधिकृत समूह बन जाते हैं।
यह संख्या उस देश के लिए अत्यंत चौंकाने वाली है जिसे पश्चिम में कुशल और कानूनी प्रवासियों के स्रोत के रूप में देखा जाता है। यह आंकड़ा भारतीय प्रवासन की एक कम चर्चित वास्तविकता को उजागर करता है — जो बेरोजगारी, असमानता और "अमेरिकन ड्रीम" की चाहत से प्रेरित है।
डंकी रूट: भारतीय अवैध रूप से कैसे पहुँचते हैं?
"डंकी रूट" — पंजाबी शब्द "डुंकी" से लिया गया जिसका अर्थ है "एक जगह से दूसरी जगह कूदना" — इसमें दलालों की मदद से कई देशों की सीमाएँ पार की जाती हैं। तस्कर प्रवासियों को नई दिल्ली और मुंबई से टूरिस्ट वीज़ा पर UAE ले जाते हैं, फिर वेनेजुएला, निकारागुआ और ग्वाटेमाला जैसे एक दर्जन लैटिन अमेरिकी देशों से होते हुए अमेरिका-मेक्सिको सीमा तक पहुँचाते हैं।
इस "डंकी रूट" की लागत आमतौर पर $40,000 से $50,000 प्रति व्यक्ति होती है। परिवार इसे एक निवेश मानते हैं और ज़मीन-जायदाद बेचकर पैसे जुटाते हैं। यह यात्रा अत्यंत खतरनाक है। पंजाब के एक प्रवासी ने कोलंबिया, पेरू, इक्वाडोर और पनामा के जंगलों से गुज़रते हुए रास्ते में कम से कम 40 लाशें देखीं। इसके बावजूद संख्याएँ बढ़ती रहीं — 2023 में 96,917 भारतीयों को सीमा पर पकड़ा या निष्कासित किया गया, जो 2021 में 30,662 थी।
लाठी और गाजर: ट्रम्प की दोहरी रणनीति
स्व-निर्वासन का प्रस्ताव ट्रम्प की आप्रवासन नीति की "गाजर" है। "लाठी" का प्रहार भारत पहले ही महसूस कर चुका है। 5 फरवरी 2025 को लगभग 104 भारतीय नागरिकों को अमेरिकी सैन्य विमान से पंजाब के अमृतसर भेजा गया — यह किसी सैन्य विमान की सबसे दूरस्थ निर्वासन उड़ान थी। प्रवासियों के हाथ और पैर बेड़ियों में जकड़े हुए थे।
इस निर्वासन की भारतीय विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। सांसद शशि थरूर ने इसे "भारत और भारतीयों की गरिमा का अपमान" बताया। अब $2,600 का स्व-निर्वासन बोनस — निःशुल्क उड़ान और नागरिक जुर्माने की माफी के साथ — एक अधिक सम्मानजनक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
अर्थशास्त्र: अमेरिका यह प्रस्ताव क्यों दे रहा है?
वाशिंगटन के नज़रिए से गणित सीधा है। ICE के अनुमान के अनुसार किसी अनधिकृत प्रवासी को गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और निर्वासित करने की औसत लागत लगभग $17,000 है। इसलिए $2,600 का बोनस देना सरकार के लिए कहीं अधिक किफायती है।
DHS का दावा है कि जनवरी 2025 से अब तक 22 लाख लोगों ने स्वेच्छा से स्व-निर्वासन किया है, जिनमें से "हज़ारों" ने CBP Home App का उपयोग किया। हालांकि ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन ने DHS के आंकड़ों पर प्रश्न उठाए हैं।
ताज महल का पोस्टर क्या संकेत देता है?
ताज महल का उपयोग एक सोचा-समझा कदम है। यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर अनधिकृत प्रवासन के स्रोत के रूप में सीधे चिन्हित कर रहा है — एक तथ्य जिसे भारत की सरकार और मीडिया अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। इससे भारत को कोलंबिया और चीन के समकक्ष रखा गया है। जो देश मोदी-ट्रम्प संबंधों पर गर्व करता है, उसे इस तरह सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
भारत की असहज स्थिति
भारत सरकार दो कठिन वास्तविकताओं के बीच फँसी है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन के साथ मधुर संबंध बनाए रखने के लिए निर्वासन को चुपचाप स्वीकार करना है। मोदी सरकार ने अमेरिका से 18,000 अनधिकृत भारतीय प्रवासियों की वापसी की सुविधा देने पर सहमति जताई है।
दूसरी तरफ, बेड़ियों में जकड़े भारतीय नागरिकों को सैन्य विमान से उतरते देखना देश में राजनीतिक रूप से शर्मनाक है — विशेषकर पंजाब और गुजरात में जहाँ लाखों मतदाताओं के परिजन विदेश में हैं। पंजाब और हरियाणा पुलिस को अवैध ट्रैवल एजेंटों की पहचान के लिए विशेष जाँच दल बनाने को कहा गया है।
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