Source: PIB| Date: April 8, 2026

भारत तीसरे स्थान पर: रैंकिंग का वास्तविक अर्थ
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय उर्जा एजेंसी (IRENA) द्वारा जारी नवीकरणीय उर्जा सांख्यिकी 2026 के अनुसार, भारत ने वैश्विक नवीकरणीय उर्जा स्थापित क्षमता में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है — यह आंकड़े दिसंबर 2025 के हैं। भारत ने ब्राज़ील को पीछे छोड़ते हुए चीन और अमेरिका के साथ विश्व की प्रमुख स्वच्छ उर्जा शक्तियों में अपनी जगह बनाई।
नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि वित्त वर्ष 2025–26 में भारत ने 55.29 GW गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ी — यह न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि पिछले सर्वाधिक जोड़ 29.5 GW (2024–25) से लगभग दोगुना है। 31 मार्च 2026 तक संचयी गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता 283.46 GW हो गई, जिसमें 274.68 GW नवीकरणीय उर्जा और 8.78 GW परमाणु उर्जा शामिल है।
हालांकि, इस रैंकिंग को संदर्भ सहित देखना ज़रूरी है। भारत की 250.52 GW नवीकरणीय क्षमता, चीन की 2,258 GW की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत है। यह रैंकिंग समतुल्यता का नहीं, बल्कि चरित्र और गति का संकेत है।
वैश्विक नवीकरणीय उर्जा स्थापित क्षमता (GW)
|
देश |
क्षमता (GW) |
वैश्विक रैंक |
|
चीन |
2,258.02 |
#1 |
|
अमेरिका |
467.92 |
#2 |
|
भारत |
250.52 |
#3 |
|
ब्राज़ील |
228.20 |
#4 |
|
जर्मनी |
199.92 |
#5 |
रिकॉर्ड उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र की उछाल
वित्त वर्ष 2025–26 के आंकड़े केवल वृद्धिशील नहीं, बल्कि एक ढांचागत बदलाव को दर्शाते हैं। सौर उर्जा क्षमता में 44.61 GW की वृद्धि हुई — 34 GW के लक्ष्य से कहीं अधिक और 2024–25 के पिछले रिकॉर्ड 23.83 GW से लगभग दोगुनी। भारत ने 150 GW सौर उर्जा का ऐतिहासिक मील पत्थर पार कर लिया है।
शायद सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण की कहानी है। सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता एक ही वित्त वर्ष में लगभग 74 GW से बढ़कर 172 GW हो गई। इसका सीधा असर आयात के आंकड़ों में दिखता है — सौर मॉड्यूल आयात USD 2,152 मिलियन से घटकर USD 758 मिलियन हो गई — लगभग तीन गुनी कमी। पवन उर्जा क्षमता में 2014 में 10 GW से 2026 तक 24 GW तक विस्तार हुआ। पवन उर्जा क्षमता वृद्धि 6.05 GW रही — किसी एक वर्ष में अब तक की सर्वाधिक।
वितरित नवीकरणीय उर्जा (DRE) ने कुल सौर वृद्धि का 36 प्रतिशत अर्थात् 16.3 GW योगदान दिया, जिसमें PM KUSUM (7.6 GW) और छत सौर (8.7 GW) शामिल हैं। PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने अकेले FY26 में 22.7 लाख घरेलू सौर संस्थापन किए।
चरम बनाम वार्षिक उत्पादन: एक महत्वपूर्ण अंतर
सरकार का मुख्य आंकड़ा — जुलाई 2025 में नवीकरणीय उर्जा ने भारत की कुल विद्युत मांग का 51.5 प्रतिशत पूरा किया — प्रभावशाली है, लेकिन इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है। यह एक वास्तविक समय की चरम सीमा थी, जो अनुकूल मानसून परिस्थितियों के कारण सौर और जलविद्युत उत्पादन एक साथ उच्च स्तर पर थी। वार्षिक औसत अधिक सटीक तस्वीर देता है: गैर-जीवाश्म स्रोतों का वार्षिक उतपादन में हिस्सा 29.2 प्रतिशत रहा।
शाम के घंटे, सर्दियों और बादली दिनों में कोयला अभी भी अपरिहार्य है। वार्षिक कोयले-आधारित बिजली उत्पादन 1,250.189 BU रहा — केवल 3.69 प्रतिशत की गिरावट। भारत का कुल विद्युत उतपादन 1,845.921 BU हो गया, और जीवाश्म ईंधन का हिस्सा लगभग 71 प्रतिशत बना हुआ है। संक्षमण जारी है, लेकिन बड़े पैमाने पर बैटरी भंडारण या पंप हाइड्रो के बिना बेसलोड समस्या हल नहीं होती।
हरित हाइड्रोजन: महत्वाकांक्षा से मूल्य संकेत तक
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) ने FY26 में वास्तविक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की: SECI नीलाम में ओड़िशा के IFFCO को हरित अमोनिया आपूर्ति के लिए मूल्य खोज रु. 49.75 प्रति किलोग्राम रही — जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है। संवर्धित औसत रु. 53.27 प्रति किलोग्राम रही।
JSW ने नवंबर 2025 में 3,600 MTPA हरित हाइड्रोजन उतपादन क्षमता का संचालन शुरू किया। मार्च 2026 में 670,000 टन प्रति वर्ष के हरित अमोनिया खरीद-बिक्री समझौते हस्ताक्षरित हुए, जिनसे लगभग $2.5 अरब विदेशी मुद्रा की बचत की संभावना है। कांडला, पारादीप और तूतिकोरिन हरित हाइड्रोजन हब घोषित किए गए हैं। यदि ये मूल्य संकेत बड़े पैमाने पर बने रहें, तो भारत की हरित हाइड्रोजन की कहानी घरेलू डीकार्बनाइजेशन से निर्यात व्यापार की दिशा में बढ़ सकती है।
नीति परिदृश्य: महत्वपूर्ण सुधार और ढांचागत बदलाव
FY26 में कई नीतिगत हस्तक्षेप हुए जिनका आर्थिक प्रभाव दीर्घकालिक होगा:
500 GW का लक्ष्य: महत्वाकांक्षा का गणित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने COP26 में 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता का संकल्प लिया है। मार्च 2026 तक 283.46 GW स्थापित होने के साथ, अगले चार वर्षों में लगभग 217 GW और जोड़ना होगा। इसका अर्थ है कि हर वर्ष लगातार 55 GW से अधिक की दर से वृद्धि बनाए रखनी होगी — बिना किसी फ़ीके वर्ष के। इतिहास में इस पैमाने पर किसी देश ने इतनी निरंतर गति नहीं बनाए रखी।
जोखिम ढांचागत हैं। पारेषण अवसंरचना और भंडारण तैनाती उतपादन क्षमता के साथ कदम नहीं रख सकी। कुछ राज्यों में नवीकरणीय उर्जा की कटौती पहले से हो रही है। भूमि अधिग्रहण, मार्ग-अधिकार क्लीयरेंस और अंतरराज्य समन्वय बड़े पवन परियोजनाओं के लिए अब भी बाधाएं हैं। सरकार द्वारा 345 GW अतिरिक्त नवीकरणीय उर्जा संभावित क्षेत्रों की घोषणा एक योजना संकेत है — लेकिन योजना क्षेत्र स्वचालित रूप से जुड़े परियोजनाओं में नहीं बदलते।
निष्कर्ष: भारत की नवीकरणीय उर्जा की यात्रा महत्वाकांक्षा से विश्वसनीय और आंकड़ा-आधारित गति में आ गई है। FY26 की वृद्धि, विनिर्माण उछाल और हरित हाइड्रोजन के मूल्य संकेत ढांचागत रूप से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन 2030 की रिपोर्त कार्ड ग्रिड अवसंरचना, भंडारण तैनाती और कोयले पर निर्भरता के समाधान से तय होगी। तीसरा स्थान एक मील पत्थर है — अंतिम लक्ष्य नहीं।
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