पीआईबी:- 8 फरवरी 2026 को प्रकाशित
ये चर्चा में क्यों है?
भारत ने भारत–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए रोडमैप और विषयगत ढाँचे की घोषणा की है। यह शिखर सम्मेलन 16–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह वैश्विक दक्षिण (Global South) द्वारा आयोजित पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन होगा, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख नेता भाग लेंगे।
यह सम्मेलन “सात चक्र” (कार्य समूह) और “तीन सूत्र” — लोग (People), पृथ्वी (Planet) और प्रगति (Progress) — पर आधारित एक नए शासन मॉडल को प्रस्तुत करता है। इससे भारत जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-केंद्रित एआई व्यवस्था के निर्माण में एक प्रमुख वैश्विक भूमिका निभाने की स्थिति में आता है। यह आयोजन वैश्विक एआई विमर्श को केवल प्रतिस्पर्धा और नियमन से आगे बढ़ाकर सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के ठोस आकलन की दिशा में ले जाने का प्रयास है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन, प्रशासनिक सुधार और भू-राजनीतिक प्रभाव का निर्णायक साधन बन रही है। भारत के लिए एआई केवल औद्योगिक तकनीक नहीं, बल्कि विकास को तेज करने, सेवाओं की पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने और शासन को अधिक प्रभावी बनाने का रणनीतिक उपकरण है। विशाल जनसंख्या, भाषाई विविधता और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के कारण भारत समावेशी एआई प्रणालियों के लिए एक अनूठा परीक्षण मंच प्रदान करता है।
इस सम्मेलन की मेजबानी भारत की उस महत्वाकांक्षा को दर्शाती है जिसमें वह केवल तकनीकी सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि वैश्विक एआई शासन का मानक निर्धारित करने वाला देश बनना चाहता है, विशेषकर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए। यह पहल भारत की व्यापक नीति-दृष्टि — कल्याण, समानता और तकनीकी आत्मनिर्भरता — के अनुरूप है।
मुख्य संदर्भ कारक:
मुख्य दर्शन: तीन सूत्र
यह शिखर सम्मेलन तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है, जो नैतिकता और नीतिनिर्माण को आपस में जोड़ते हैं।
People
एआई का उद्देश्य मानव गरिमा और सामाजिक समावेशन की सेवा करना होना चाहिए। “लोग” सूत्र इस बात पर बल देता है कि तकनीक असमानता बढ़ाने के बजाय भरोसा मजबूत करे, अधिकारों की रक्षा करे और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को विस्तृत बनाए।
पृथ्वी (Planet)
एआई का विकास पर्यावरणीय स्थिरता के अनुरूप होना चाहिए। बड़े पैमाने पर एआई अवसंरचना का ऊर्जा पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह शिखर सम्मेलन डिजिटल विस्तार को जलवायु जिम्मेदारी से जोड़ता है।
प्रगति (Progress)
तकनीकी उन्नति का परिणाम समावेशी विकास के रूप में सामने आना चाहिए। ध्यान केवल नवाचार पर नहीं, बल्कि उसके आर्थिक और सामाजिक लाभों को व्यापक रूप से साझा करने पर है।
सात चक्र: कार्यान्वयन ढाँचा
यह शिखर सम्मेलन अपनी मूल दर्शन को सात विषयगत कार्य-समूहों (चक्रों) के माध्यम से लागू करता है।
1. मानव पूंजी (Human Capital)
भारत स्वयं को एक वैश्विक एआई प्रतिभा केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, साथ ही कार्यबल के संक्रमण का प्रबंधन भी कर रहा है। मानव पूंजी चक्र का उद्देश्य समाज को एआई-चालित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है, जिसमें कौशल तंत्र का विस्तार और समान भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। भारत में एआई भर्ती और प्रशिक्षण की तेज़ वृद्धि ज्ञान नेतृत्व की ओर बदलाव का संकेत देती है। ध्यान केवल उच्च स्तरीय विशेषज्ञता पर नहीं, बल्कि व्यापक पुनःकौशल (reskilling) पर है, ताकि रोजगार विस्थापन के जोखिम कम हों।
मुख्य बिंदु:
2. सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन (Inclusion for Social Empowerment)
यह चक्र एआई को सामाजिक अवसंरचना में एकीकृत कर विविध आबादी की सेवा करता है। भारत के बहुभाषी और वॉयस-आधारित प्लेटफ़ॉर्म दिखाते हैं कि एआई साक्षरता और भाषा बाधाओं को कैसे दूर कर सकता है। यहाँ समावेशन को बाद की सोच नहीं, बल्कि मूल डिज़ाइन सिद्धांत माना गया है।
मुख्य पहल:
3. सुरक्षित और विश्वसनीय एआई (Safe and Trusted AI)
विश्वास, एआई अपनाने का केंद्र है। भारत नवाचार को बाधित किए बिना एआई जोखिमों के प्रबंधन के लिए संस्थागत सुरक्षा ढाँचा विकसित कर रहा है। शासन मॉडल सुरक्षा और तकनीकी विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
मुख्य उपाय:
4. लचीलापन, नवाचार और दक्षता (Resilience, Innovation and Efficiency)
एआई विस्तार को स्थिरता और अवसंरचना लचीलेपन से जोड़ा जा रहा है। भारत पर्यावरणीय लागत को कम करते हुए क्षमता विस्तार के लिए दक्ष प्रणालियों में निवेश कर रहा है।
मुख्य विकास:
5. विज्ञान (Science)
एआई सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग को तेज कर रहा है। भारत मौसम पूर्वानुमान, ऊर्जा नियोजन और शोध को व्यावहारिक लाभ में बदलने के लिए एआई का उपयोग कर रहा है।
मुख्य प्रगति:
6. एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण (Democratising AI Resources)
कंप्यूटिंग और डेटा तक पहुँच वैश्विक स्तर पर सीमित है। भारत साझा एआई अवसंरचना विकसित कर निर्भरता कम करने और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
मुख्य उपलब्धियाँ:
7. आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए एआई (AI for Economic Growth and Social Good)
एआई को मापनीय विकास परिणामों के लिए बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग से उत्पादकता और सेवा वितरण में प्रत्यक्ष सुधार दिखाई दे रहा है।
मुख्य प्रभाव:
भूराजनीतिक महत्व
यह शिखर सम्मेलन केवल तकनीकी आयोजन नहीं है, बल्कि वैश्विक डिजिटल कूटनीति में भारत की भूमिका को मजबूत करने वाला रणनीतिक कदम है। यह एआई शासन पर वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व वाला एक मंच प्रदान करता है, जिससे विकासशील देशों की आवाज़ अंतरराष्ट्रीय विमर्श में अधिक प्रभावशाली बनती है।
मुख्य प्रभाव:
मुख्य चुनौतियाँ
महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद कई संरचनात्मक चुनौतियाँ मौजूद हैं, जो इस शिखर सम्मेलन के दीर्घकालिक प्रभाव को तय करेंगी।
इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान ही तय करेगा कि यह शिखर सम्मेलन प्रतीकात्मक आयोजन बनकर रह जाएगा या वास्तव में वैश्विक एआई शासन को नई दिशा देगा।