भारत इलेक्ट्रॉनिक कचरे में विश्व में तीसरे स्थान पर, स्वास्थ्य जोखिम बढ़े

भारत इलेक्ट्रॉनिक कचरे में विश्व में तीसरे स्थान पर, स्वास्थ्य जोखिम बढ़े

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Category : National Published on: October 06 2025

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भारत की तीव्र डिजिटल वृद्धि के साथ एक गंभीर चुनौती भी सामने आई है – इलेक्ट्रॉनिक कचरा। वर्ष 2025 में देश ने 22 लाख मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न किया, जिससे यह चीन और अमेरिका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया। अनौपचारिक पुनर्चक्रण के तरीकों से श्रमिकों और आसपास के समुदायों को सीसा, मरकरी और कैडमियम जैसी विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का खतरा रहता है, जिससे श्वसन रोग, तंत्रिका संबंधी विकार और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह समस्या unchecked डिजिटल उपयोग, कमजोर निगरानी और सुरक्षित निपटान के प्रति कम जागरूकता के कारण बनी हुई है। इन जोखिमों को कम करने के लिए सख्त नियमावली, उपभोक्ता जागरूकता अभियान, श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रथाओं को अपनाना आवश्यक कदम माना जा रहा है, ताकि भारत की डिजिटल प्रगति और पर्यावरण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में संतुलन कायम रखा जा सके।

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