AI चिप्स के निर्यात के लिए अमेरिका का नया नियम क्या है?

AI चिप्स के निर्यात के लिए अमेरिका का नया नियम क्या है?

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द हिंदू: 23 जनवरी 2025 को प्रकाशित:

 

 

खबर में क्यों है?

अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (BIS) ने AI चिप्स के निर्यात के लिए नए नियम लागू किए हैं।

यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र और बाइडन प्रशासन के अंतिम नीतिगत फैसलों में से एक के रूप में उठाया गया है।

 

इस नियम का उद्देश्य:

  • अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों और "चिंताजनक देशों" को उन्नत AI तकनीकों की पहुंच को प्रतिबंधित करना।
  • लाइसेंसिंग और निर्यात के लिए सख्त शर्तों के तहत AI तकनीकों का जिम्मेदार और सुरक्षित प्रसार सुनिश्चित करना।
  • AI तकनीक के दुरुपयोग को रोकना, जैसे सैन्य उपयोग, साइबर हमले और मानवाधिकार उल्लंघनों (जैसे बड़े पैमाने पर निगरानी) के लिए।

 

इस नियम की मुख्य विशेषताएँ:

स्तरीय लाइसेंसिंग ढांचा (Tiered Framework):

टियर 1: 18 भरोसेमंद सहयोगी देशों (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान आदि) के लिए कोई प्रतिबंध नहीं।

टियर 2: भारत और चीन जैसे देशों के लिए आंशिक प्रतिबंध। उन्नत AI मॉडल में योगदान देने वाले लेनदेन के लिए लाइसेंसिंग अनिवार्य।

टियर 3: उत्तर कोरिया, ईरान और रूस जैसे प्रतिबंधित देशों को तकनीक पर पूरी तरह से प्रतिबंध।

एडवांस कंप्यूटिंग चिप्स पर ध्यान केंद्रित: उच्च कम्प्यूटेशनल क्षमता वाले चिप्स और AI मॉडल वेट्स (weights) को लक्षित किया गया है ताकि यह तकनीक गलत हाथों में न जाए।

सुरक्षा शर्तें: निर्यातित AI तकनीकों को सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा ताकि उनका दुरुपयोग रोका जा सके।

 

पहुंच को सीमित क्यों किया गया है?

यह सुनिश्चित करने के लिए कि AI तकनीक का उपयोग विरोधी देश सैन्य निर्णय लेने, योजना बनाने और लॉजिस्टिक्स में न कर सकें।

बड़े पैमाने पर निगरानी, साइबर हमलों और सामूहिक विनाश के हथियारों के विकास की संभावनाओं को कम करना।

चीनी कंपनियों द्वारा विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से चिप्स प्राप्त करने के खतरे को रोकना।

 

उद्योग की प्रतिक्रिया

चिंताएँ:

AI और चिप निर्माण में अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचने का खतरा।

यह दावा कि नियम अमेरिका की सुरक्षा को मजबूत करने में अधिक प्रभावी नहीं होंगे।

बाजार हिस्सेदारी खोने का खतरा, खासकर हुआवेई और टेनसेंट जैसे गैर-अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के पक्ष में।

 

विरोध:

NVIDIA ने तर्क दिया कि यह नियम उपभोक्ता हार्डवेयर के नवाचार को बाधित करेंगे।

Oracle ने बताया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां अधिक GPU का उपयोग करके समान प्रदर्शन प्राप्त कर सकती हैं।

 

भारत पर प्रभाव

भारत को टियर 2 में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि उन्नत AI चिप्स की तैनाती के लिए कंपनियों को प्राधिकरण की आवश्यकता होगी।

भारतीय डेटा सेंटर लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए VEU प्राधिकरण का उपयोग कर सकते हैं।

रूस को चिप्स की संभावित लीकेज के कारण भारत को "भरोसेमंद सहयोगी" की सूची में शामिल नहीं किया गया।

हालांकि, यह नियम भारत के नागरिक और सैन्य उपयोग पर बड़ा प्रभाव नहीं डालता।

 

व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ

  • यह कदम अमेरिका-चीन के बीच प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में उठाया गया है।
  • AI को राष्ट्रीय सुरक्षा और नवाचार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।
  • तकनीकी उद्योग को उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन इन नियमों को बदल सकता है।

 

निष्कर्ष:

AI चिप्स के निर्यात पर अमेरिका के नए नियम राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हैं। उद्योग द्वारा नवाचार में संभावित बाधाओं और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। भारत के लिए, प्रभाव सीमित है, लेकिन "भरोसेमंद सहयोगियों" की सूची में अनुपस्थिति तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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