द हिंदू: 27 नवंबर 2025 को पब्लिश हुआ।
चर्चा में क्यों?
अमेरिका द्वारा दक्षिण अमेरिका (लैटिन अमेरिका) की दक्षिणपंथी सरकारों को दिए जा रहे आर्थिक समर्थन के कारण वहाँ के वित्तीय बाज़ारों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है। निवेशकों का मानना है कि वाशिंगटन की राजनीतिक विचारधारा अब लैटिन अमेरिकी बाज़ार जोख़िम निर्धारण को प्रभावित कर रही है।
पृष्ठभूमि:
ट्रंप प्रशासन उन सरकारों का समर्थन कर रहा है जो निजीकरण, बजट कटौती और मुक्त बाज़ार की नीतियां अपनाती हैं।
ट्रंप ने वामपंथी सरकारों (विशेषकर वेनेज़ुएला, कोलंबिया के Gustavo Petro जैसी) की आलोचना की है, जबकि अर्जेंटीना जैसी दक्षिणपंथी सरकारों को भारी आर्थिक लाभ दिया है।
इससे निवेशकों में धारणा बनी है कि राजनीतिक विचारधारा से आर्थिक सहायता तय हो रही है।
मुख्य मुद्दे और विकास:
लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथ का उभार
अर्जेंटीना, इक्वाडोर, एल सल्वाडोर और बोलीविया में दक्षिणपंथी शासन।
चिली में भी कास्ट के सत्ता में आने के आसार।
अगले वर्ष पेरू और कोलंबिया में भी दक्षिणपंथी जीत की संभावना।
अमेरिका का आर्थिक प्रभाव:
अमेरिका ने अर्जेंटीना को 20 अरब डॉलर तक की सहायता दी, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था स्थिर हुई और क्रेडिट डाउनग्रेड टल गया।
इससे संकेत मिलता है कि राजनीतिक समानता से आर्थिक लाभ मिल सकते हैं।
बाज़ार प्रदर्शन:
ब्राज़ील और कोलंबिया की मुद्रा 15%–16% मजबूत हुई।
बांड और शेयर वैश्विक बाज़ारों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
चिली का शेयर बाज़ार 48% उछला।
वेनेज़ुएला के अत्यधिक संकटग्रस्त बॉन्ड वर्ष में लगभग 100% रिटर्न दे चुके हैं।
निवेशक दृष्टिकोण:
दक्षिणपंथी और अमेरिका समर्थक सरकारों को कम जोखिम वाला और व्यवसाय समर्थक माना जा रहा है।
यह धारणा बन रही है कि अमेरिका ऐसे देशों को कड़ी आर्थिक मदद देगा, जिससे निवेश सुरक्षित रहेगा।
प्रमुख प्रभाव:
आर्थिक फायदा अब विचारधारा पर निर्भर
मुक्त बाज़ार नीतियां अपनाने वाले देशों को आसानी से विदेशी निवेश और राहत मिल सकती है।
नीतियों में राजनीतिक दबाव:
कुछ देश सिर्फ अमेरिकी आर्थिक लाभ के लिए वैचारिक बदलाव कर सकते हैं।
अमेरिका की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत:
अमेरिकी सहायता को अब एक भूराजनीतिक हथियार माना जा रहा है।
निर्भरता का जोखिम:
अमेरिकी सरकार बदलने पर वही वित्तीय लाभ बदल सकते हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है।
निष्कर्ष:
लैटिन अमेरिकी राजनीति में दक्षिणपंथ की बढ़त और अमेरिकी आर्थिक समर्थन के गठजोड़ ने बाज़ार जोखिम निर्धारण को बदलना शुरू कर दिया है। अब विचारधारा आर्थिक प्रदर्शन से अधिक प्रभाव डाल रही है, जिससे वित्तीय रणनीतियाँ राजनीति-आधारित होने लगी हैं।
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