थिरुनेल्ली महाविष्णु मंदिर

थिरुनेल्ली महाविष्णु मंदिर

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स्रोत: द हिंदू

थिरुनेल्ली मंदिर हाल ही में कला और सांस्कृतिक विरासत हेतु भारतीय राष्ट्रीय न्यास (INTACH) ने सरकार के समक्ष थिरुनेल्ली, केरल के श्री महाविष्णु मंदिर में स्थित 600 वर्ष पुरानी 'विलक्कुमाडोम (एक उत्तम कोटि की ग्रेनाइट संरचना)' के संरक्षण का प्रस्ताव रखा है।

चिंता का प्रमुख विषय:

  1. उत्तम ग्रेनाइट से बनी 600 वर्ष पुरानी 'विलक्कुमाडोम संरचना, वायनाड ज़िले के थिरुनेल्ली में श्री महाविष्णु मंदिर में स्थित है।
  2. मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य ने इसकी विरासत के संरक्षण को लेकर चिंता जताई है।
  3. 15वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व की इस संरचना का एक समृद्ध इतिहास है और नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान इसके प्रमुख तत्त्वों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है।
  4. चुट्टाम्बलम (मंदिर को ढकने वाली आयताकार संरचना) के ढहने तथा 'विलक्कुमाडोम भवन के संभावित ध्वस्त से विरासत का नुकसान हुआ है और इसका मूल्य एवं महत्त्व कम हुआ है जिसे भविष्य में भुला दिया जा सकता है या गलत समझा जा सकता है।
  5. अधूरी संरचना एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में मौजूद थी लेकिन इसे असंवेदनशील/अनुचित तरीके से फिर से तैयार किया गया है।
  6. ऐसा कहा जाता है कि कूर्ग के राजा ने मंदिर के संरक्षक कोट्टायम राजा की अनुमति के बिना काम शुरू किया था। बाद में कोट्टायम राजा ने निर्माण कार्य का आदेश दिया और तबसे संरचना मौजूद है।

थिरुनेल्ली मंदिर:

परिचय:

थिरुनेल्ली मंदिर, जिसे अमलका या सिद्ध मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, केरल के वायनाड ज़िले में एक विष्णु मंदिर है।

इस मंदिर का नाम एक घाटी में एक आँवले के पेड़ पर आराम कर रहे भगवान विष्णु की मूर्ति से पड़ा है, जिसे भगवान ब्रह्मा ने पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए खोजा था।

थिरुनेल्ली मंदिर की वास्तुकला:

थिरुनेल्ली मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक केरल शैली का अनुसरण करती है। मंदिर में एक आंतरिक गर्भगृह है, जिसकी छत की संरचना टाइल से बनी हुई है और इसके चारों ओर एक खुला प्रांगण है।

मंदिर के पूर्व प्रवेश द्वार को ग्रेनाइट के दीपस्तंभ से सजाया गया है। मंदिर की बाहरी दीवार ग्रेनाइट के खंभों से बनी है और यह कक्ष शैली में काटे गए हैं, जो सामान्यतः केरल में नहीं देखे जाते हैं।

सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिये प्रयास:

वैश्विक:

  1. अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये अभिसमय, 2005
  2. सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की विविधता के संरक्षण और संवर्द्धन पर अभिसमय, 2006
  3. संयुक्त राष्ट्र विश्व विरासत समिति: भारत को वर्ष 2021-25 की अवधि के लिये समिति के सदस्य के रूप में चुना गया है।

भारतीय:

  1. एडॉप्ट ए हेरिटेज कार्यक्रम
  2. प्रोजेक्ट मौसम
  3. अनुच्छेद 49 (DPSP)
  4. AMASR अधिनियम और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA)
  5. प्रसाद योजना
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