बिहार की मिट्टियाँ

बिहार की मिट्टियाँ

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परिचय

  • मिट्टी कृषि, उद्योग और संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की आधारशिला है।
  • बिहार का समस्त मैदानी क्षेत्र हिमालय से आने वाली नदियों द्वारा लाए गए गाढ़े जलोढ़ (Alluvium) से बना है।
  • यहाँ की मिट्टियाँ अधिकांशतः युवा जलोढ़ दोमट हैं, जो हर वर्ष नदियों द्वारा लाए गए गाद, बालू और चिकनी मिट्टी से समृद्ध होती रहती हैं।
  • पोषक तत्वों की स्थिति:
    • अल्प मात्रा में → नाइट्रोजन, फॉस्फोरिक अम्ल, ह्यूमस
    • पर्याप्त मात्रा में → पोटाश और चूना

 

बिहार की प्रमुख मिट्टियों के प्रकार

बिहार में मुख्यतः तीन प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं:

 

1. पीडमॉन्ट दलदली मिट्टी (Piedmont Swamp Soil)

  • क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी पश्चिम चंपारण
  • निर्माण: शिवालिक पर्वत के नीचे स्थित निम्न, दलदली एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में।
  • विशेषताएँ:
    • अधिक नमी, चिकनी बनावट
  • उपयोग:
    • धान (paddy) की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त

 

2. तराई मिट्टी (Terai Soil)

  • क्षेत्र: नेपाल सीमा के साथ उत्तर बिहार
  • निर्माण: जहाँ भाबर क्षेत्र की भूमिगत धाराएँ पुनः सतह पर आती हैं।
  • विशेषताएँ:
    • जल निकास कम (Poorly drained)
    • अत्यधिक आर्द्र, सिल्टी, जैविक पदार्थ से भरपूर
    • नाइट्रोजन अधिक, फॉस्फेट की कमी
  • प्रमुख फसलें:
    • चावल, गेहूँ, गन्ना, जूट
  • अन्य विशेषता:
    • ऊँची घासों और सघन वनों वाला क्षेत्र

 

3. गंगा जलोढ़ मिट्टी (Gangetic Alluvial Soil)

बिहार के लगभग पूरे मैदानी क्षेत्र में पाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण मिट्टी।

निर्माण

  • गंगा प्रणाली की नदियाँ:
    गंगा, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन, महानंदा, बागमती
     द्वारा लाए गए जलोढ़ से निर्मित।

मुख्य विशेषताएँ

  • युवा, छिद्रयुक्त, दोमट; मिट्टी प्रोफ़ाइल का विकास कम।
  • बनावट: रेतीली दोमट से चिकनी दोमट
  • पुरानी जलोढ़ मिट्टी में कंकर (lime nodules) की उपस्थिति।
  • बार-बार बाढ़ से मिट्टी का निरंतर पुनर्भरण

रासायनिक गुण

  • नाइट्रोजन कम
  • पोटाश, फॉस्फेट और क्षार (alkalies) पर्याप्त
  • लौह ऑक्साइड और चूने की मात्रा परिवर्तनीय

प्रमुख फसलें

  • धान, गेहूँ, मक्का, दालें, गन्ना, जूट, तंबाकू, तिलहन, सब्जियाँ, फल

 

जलीय मिट्टी के उप-प्रकार

(a) बांगर (Bhangar) — पुरानी जलोढ़ मिट्टी

  • बाढ़ मैदान से ऊँचे भू-भाग पर पाई जाती है।
  • रंग गहरा, बनावट अधिक चिकनी।
  • सतह से कुछ मीटर नीचे कंकर परत पाई जाती है।

(b) खादर (Khadar) — नई जलोढ़ मिट्टी

  • सक्रिय बाढ़ मैदानों में पाई जाती है।
  • हर वर्ष बाढ़ से नई परतें जमा होती हैं।
  • अधिक उपजाऊ, हल्की और रेतीली — कृषि के लिए सर्वोत्तम।

 

बिहार की मिट्टी प्रोफ़ाइल की मुख्य विशेषताएँ

  • अधिकांश मिट्टी नदीय निक्षेपण से बनी है।
  • सामान्यतः मिट्टियाँ अत्यंत उपजाऊ हैं।
  • सिंचाई की उपलब्धता होने पर कृषि उत्पादन बहुत अधिक।
  • मिट्टी का विविध स्वरूप— खरीफ और रबी दोनों फसलों की खेती संभव।

 

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