शिवगिरी विवाद: आक्रोश किस बात पर है?

शिवगिरी विवाद: आक्रोश किस बात पर है?

Static GK   /   शिवगिरी विवाद: आक्रोश किस बात पर है?

Change Language English Hindi

द हिंदू: 3 जनवरी 2025 को प्रकाशित:

 

क्यों चर्चा में:

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के 92वें शिवगिरी तीर्थयात्रा कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयानों ने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने सनातन धर्म और इसके जातिवादी ढांचे पर सवाल उठाए। उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कीं, जिससे शिवगिरी मठ और श्री नारायण गुरु की विरासत का महत्व फिर से चर्चा में आया।

 

अब तक की कहानी:

पृष्ठभूमि: मुख्यमंत्री विजयन ने श्री नारायण गुरु की विचारधारा को सनातन धर्म से जोड़ने के प्रयासों की आलोचना की। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव का समर्थन करने वाला बताया और गुरु की मानवतावादी और जाति उन्मूलन की विरासत पर जोर दिया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP ने इस बयान की आलोचना की और इसे तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की तरह सनातन धर्म विरोधी करार दिया। कांग्रेस ने भी चिंता जताई, लेकिन इसके भीतर सनातन धर्म की परिभाषा को लेकर मतभेद सामने आए।

प्रसंग: ये बहसें केरल के सामाजिक सुधार आंदोलन, जिसमें नारायण गुरु की प्रमुख भूमिका थी, की पृष्ठभूमि में हो रही हैं।

 

शिवगिरी मठ क्यों महत्वपूर्ण है?

ऐतिहासिक भूमिका: श्री नारायण गुरु द्वारा स्थापित शिवगिरी मठ सामाजिक सुधार, समावेशिता और जाति उन्मूलन का प्रतीक है।

दर्शन: गुरु का “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का संदेश जाति और धार्मिक भेदभाव से परे है। उन्होंने SNDP योगम की स्थापना oppressed जातियों, खासकर एझवा समुदाय के उत्थान के लिए की।

आधुनिक प्रासंगिकता: शिवगिरी आज भी गुरु की विरासत का केंद्र है और केरल के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करता है।

 

राजनीतिक दल शिवगिरी मठ के प्रति क्यों आकर्षित हैं?

एझवा वोट बैंक: एझवा समुदाय, जो केरल की जनसंख्या का 23% है, एक महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग है। पारंपरिक रूप से LDF समर्थक यह समुदाय अब BJP और UDF की ओर झुक रहा है।

बीजेपी की रणनीति: BJP नारायण गुरु की विरासत को हिंदुत्व के दायरे में लाने और केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

प्रति-उपाय: CPI(M) और कांग्रेस इन प्रयासों का विरोध कर रहे हैं और समुदाय व गुरु के आदर्शों के साथ अपने ऐतिहासिक संबंध को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। 

 

शिवगिरी मठ का दृष्टिकोण क्या है?

तटस्थता: मठ ने राजनीतिक दलों से समान दूरी बनाए रखी है और इसे एक आध्यात्मिक और सामाजिक सुधार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया है।

संगति: मठ ने जाति-आधारित पुजारी प्रथा की आलोचना की है और राजनीतिक विचारधाराओं से दूर रहने का प्रयास किया है।

मुख्य फोकस: मठ गुरु के समानता आधारित सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और राजनीतिक दबावों से सावधानीपूर्वक बचता है।

 

निष्कर्ष:

शिवगिरी विवाद धर्म, जाति और राजनीति के केरल में गहरे जुड़े रिश्ते को दर्शाता है। श्री नारायण गुरु की विरासत, जो मानवता और सामाजिक समानता पर आधारित है, अभी भी विवादित लेकिन सम्मानित क्षेत्र बनी हुई है। शिवगिरी मठ की संतुलित स्थिति इस सुधारवादी विरासत को राजनीतिक परिवर्तनों के बीच सुरक्षित रखने की जटिलता को दर्शाती है। 

Other Post's
  • जलवायु लक्ष्यों पर भारत की प्रगति:

    Read More
  • होदी क्राफ्ट

    Read More
  • उत्तर प्रदेश पर्यटन (Uttar Pradesh Tourism)

    Read More
  • अडानी पर रिश्वतखोरी और प्रतिभूति धोखाधड़ी के लिए अमेरिका में अभियोग लगाया गया:

    Read More
  • बड़े पैमाने पर शेल्फ बादलों का गठन

    Read More