सरस्वती सम्मान
सरस्वती सम्मान भारत के सबसे सम्मानित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है, जो भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में रचित असाधारण गद्य या पद्य को मान्यता देता है। ज्ञान, विद्या और कला की प्रतीक हिंदू देवी माँ सरस्वती के नाम पर रखा गया यह पुरस्कार, भारत की बहुभाषी साहित्यिक विरासत की समृद्धि और बौद्धिक उत्कृष्टता का उत्सव मनाता है। अपनी स्थापना के बाद से, सरस्वती सम्मान साहित्यिक प्रतिष्ठा का एक मानक बन गया है, जो उन कृतियों को रेखांकित करता है जो कलात्मक योग्यता के साथ-साथ गहन सांस्कृतिक और दार्शनिक अंतर्दृष्टि का मेल कराती हैं।

सरस्वती सम्मान: पुरस्कार का अवलोकन
सरस्वती सम्मान व्यापक रूप से भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में से एक माना जाता है। राष्ट्र की विविध भाषाई विरासत को बढ़ावा देने के लिए स्थापित यह पुरस्कार उन असाधारण साहित्यिक कृतियों को मान्यता देता है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और वैचारिक जगत पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।
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श्रेणी |
विवरण |
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प्रायोजक संस्था |
के. के. बिड़ला फाउंडेशन |
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स्थापना वर्ष |
1991 |
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मुख्यालय |
दिल्ली, भारत |
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क्षेत्र |
साहित्य (22 भारतीय भाषाओं में गद्य या पद्य) |
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पुरस्कार राशि |
₹15,00,000 (प्रशस्ति पत्र और पट्टिका के साथ) |
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प्रथम विजेता |
हरिवंश राय बच्चन (1991) |
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नवीनतम विजेता |
भद्रेशदास स्वामी (2024) |
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कुल सम्मानित व्यक्ति |
34 |
उत्पत्ति और स्थापना
सरस्वती सम्मान की स्थापना 1991 में के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा की गई थी, जो भारतीय साहित्य, शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक संस्था है। इस पुरस्कार की कल्पना भाषाई सीमाओं से परे साहित्यिक उत्कृष्टता को सम्मानित करने और वैश्वीकरण के इस दौर में भारतीय भाषाओं के प्रति गंभीर जुड़ाव को प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। इस सम्मान के अंतर्गत निम्नलिखित प्रदान किया जाता है:
चयन प्रक्रिया
सरस्वती सम्मान की चयन प्रक्रिया अत्यंत कठोर और विद्वत्तापूर्ण होती है। इसके लिए पात्र कृतियों का प्रकाशन पिछले दस वर्षों के भीतर होना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह पुरस्कार उस साहित्य को मिले जो आलोचनात्मक मूल्यांकन और जन-स्वीकार्यता की कसौटी पर खरा उतरा हो। चयन प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं:
प्रथम पुरस्कार और प्रारंभिक विरासत
प्रथम सरस्वती सम्मान महान हिंदी कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन को प्रदान किया गया था। उन्हें यह सम्मान उनकी ऐतिहासिक चार खंडों वाली आत्मकथा के लिए मिला था:
अन्य प्रमुख साहित्यिक पुरस्कारों के साथ संबंध
सरस्वती सम्मान अक्सर अन्य प्रमुख भारतीय साहित्यिक सम्मानों के लिए एक मार्गदर्शक या साथी सम्मान के रूप में कार्य करता रहा है। कई प्राप्तकर्ताओं ने बाद में अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए या वे पहले ही उन्हें प्राप्त कर चुके थे, जो सरस्वती सम्मान के कद और महत्व को और अधिक पुष्ट करता है।
उल्लेखनीय संगम (Notable Intersections):
सरस्वती सम्मान विजेता
1991 से, सरस्वती सम्मान ने भारत के कुछ बेहतरीन साहित्यिक मानस को मान्यता दी है। सम्मानितों की यह सूची भारतीय भाषाओं और साहित्यिक रूपों की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करती है, जो देश की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं की समृद्धि को दर्शाती है। प्रत्येक प्राप्तकर्ता के कार्य ने आधुनिक भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और पाठकों तथा विद्वानों को प्रभावित करना जारी रखा है।
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वर्ष |
प्राप्तकर्ता |
रचना |
भाषा |
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1991 |
हरिवंश राय बच्चन
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आत्मकथा (चार खंडों में) |
हिंदी |
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1992 |
रमाकांत रथ
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श्री राधा (कविता) |
ओडिया |
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1993 |
विजय तेंदुलकर
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कन्यादान (नाटक) |
मराठी |
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1994 |
हरभजन सिंह |
रुख ते ऋषि (कविता संग्रह) |
पंजाबी |
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1995 |
बालमणि अम्मा |
निवेद्यम (कविता संग्रह) |
मलयालम |
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1996 |
शम्सुर रहमान फारुकी |
शे’र-ए शोर-अंगेज़ |
उर्दू |
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1997 |
मनुभाई पांचोली |
कुरुक्षेत्र |
गुजराती |
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1998 |
शंख घोष |
गंधर्ब कबिता गुच्छा (कविता संग्रह) |
बंगाली |
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1999 |
इंदिरा पार्थसारथी |
रामानुजर (नाटक) |
तमिल |
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2000 |
मनोज दास |
अमृत फल (उपन्यास) |
ओडिया |
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2001 |
दलीप कौर तिवाना |
कथा कहो उर्वशी (उपन्यास) |
पंजाबी |
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2002 |
महेश एलकुंचवार |
युगांत (नाटक) |
मराठी |
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2003 |
गोविंद चंद्र पांडे |
भागीरथी (कविता संग्रह) |
संस्कृत |
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2004 |
सुनील गंगोपाध्याय |
प्रथम आलो (उपन्यास) |
बंगाली |
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2005 |
के. अय्यप्पा पणिक्कर |
अय्यप्पा पणिक्करुडे कृतिकल |
मलयालम |
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2006 |
जगन्नाथ प्रसाद दास |
परिक्रमा (कविता संग्रह) |
ओडिया |
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2007 |
नैयर मसूद |
ताऊस चमन की मैना (कहानी संग्रह) |
उर्दू |
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2008 |
लक्ष्मी नंदन बोरा |
कायाकल्प (उपन्यास) |
असमिया |
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2009 |
सुरजीत पातर |
लफ़्ज़ां दी दरगाह |
पंजाबी |
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2010 |
एस. एल. भैरप्पा |
मंद्र |
कन्नड़ |
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2011 |
ए. ए. मणवालन |
इरामा कथैयुम इरामयकलुम |
तमिल |
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2012 |
सुगतकुमारी |
मनलेझुथु (कविता संग्रह) |
मलयालम |
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2013 |
गोविंद मिश्र |
धूल पौधों पर (उपन्यास) |
हिंदी |
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2014 |
वीरप्पा मोइली |
रामायण महान्वेषणम (कविता) |
कन्नड़ |
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2015 |
पद्मा सचदेव |
चित्त-चेते (आत्मकथा) |
डोगरी |
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2016 |
महाबलेश्वर सैल |
हावथन (उपन्यास) |
कोंकणी |
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2017 |
सीतांशु यशश्चंद्र |
वखार (कविता संग्रह) |
गुजराती |
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2018 |
के. शिवा रेड्डी
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पक्काकी ओत्तिगिलिते (कविता) |
तेलुगु |
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2019 |
वासदेव मोही
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चेकबुक (लघु कथा श्रृंखला) |
सिंधी |
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2020 |
शरणकुमार लिंबाले
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सनातन (उपन्यास) |
मराठी |
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2021 |
राम दरश मिश्र
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मैं तो यहाँ हूँ (कविता संग्रह) |
हिंदी |
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2022 |
शिवशंकरी
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सूर्य वामसम (संस्मरण) |
तमिल |
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2023 |
प्रभा वर्मा
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रौद्र सात्विकम (काव्य उपन्यास) |
मलयालम |
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2024 |
भद्रेशदास स्वामी
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स्वामीनारायण सिद्धांत सुधा |
संस्कृत |
सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व
सरस्वती सम्मान भारत की भाषाई विविधता को संरक्षित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई भारतीय भाषाओं में रचित कृतियों को मान्यता देकर, यह भाषाई समरूपता (Homogenization) का प्रतिरोध करता है और लेखकों को अपनी मातृभाषा में सृजन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पुरस्कार: