द हिंदू: 23 जनवरी 2026 को प्रकाशित:
समाचार में क्यों? (Why in News?)
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की है कि रूस अपनी जमी हुई (फ्रोजन) संप्रभु संपत्तियों में से 1 अरब अमेरिकी डॉलर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय पहल “बोर्ड ऑफ पीस” को देने के लिए तैयार है।
यह प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि—
यह राशि रूस के जमे हुए विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है,
यह पहल गाज़ा संघर्ष और संभावित रूप से अन्य वैश्विक युद्धों को समाप्त करने से जुड़ी है,
इससे कानूनी, कूटनीतिक और भू-राजनीतिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं,
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए रूसी संपत्तियों के उपयोग पर बहस चल रही है।
पृष्ठभूमि (Background of the Issue):
फरवरी 2022 में यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद, पश्चिमी देशों ने रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए।
इनमें सबसे कड़ा कदम था— रूस के लगभग 300 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज़ करना।
इन जमी हुई संपत्तियों में—
अधिकांश यूरोपीय वित्तीय संस्थानों, विशेष रूप से यूरोक्लियर (बेल्जियम) में हैं,
लगभग 5 अरब डॉलर अमेरिका में रखे गए हैं,
रूस के कुल भंडार का लगभग 11% डॉलर में नामित था।
रूस लगातार यह कहता रहा है कि—
यह फ्रीज़िंग अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है,
यह धन रूसी राज्य की संपत्ति है और इसे जब्त नहीं किया जा सकता,
बिना अनुमति इसका उपयोग आर्थिक चोरी के समान है।
ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ योजना:
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वैश्विक शांति एजेंडे के तहत “बोर्ड ऑफ पीस” की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच होगा, जिसका उद्देश्य निम्नलिखित संघर्षों को सुलझाना है—
गाज़ा संघर्ष
यूक्रेन युद्ध
अन्य वैश्विक विवाद
इस प्रस्ताव की प्रमुख विशेषताएँ:
स्थायी सदस्यों को 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा
यह बोर्ड शांति निर्माण, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के लिए कार्य करेगा
इसे एक बहुराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है
रूस को भी इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण मिला, और राष्ट्रपति पुतिन ने सशर्त रूप से इसमें भाग लेने की इच्छा जताई।
पुतिन का प्रस्ताव और उसका महत्व:
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस गाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए अपनी जमी हुई संपत्तियों से 1 अरब डॉलर दे सकता है।
उन्होंने इस कदम को इस प्रकार उचित ठहराया—
फिलिस्तीनी जनता के साथ रूस के विशेष संबंध
मानवीय दायित्वों पर ज़ोर
वैश्विक शांति प्रयासों से जुड़ाव
हालाँकि, क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि—
यह धन तब तक स्थानांतरित नहीं किया जा सकता जब तक अमेरिका इसे अनफ्रीज़ न करे
रूस अब भी इस फ्रीज़ को अवैध मानता है
पहले कानूनी और प्रक्रियात्मक मुद्दों का समाधान आवश्यक है
कानूनी और वित्तीय जटिलताएँ:
यह प्रस्ताव कई गंभीर कानूनी बाधाओं से जुड़ा है:
संप्रभु प्रतिरक्षा (Sovereign Immunity)
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी देश की संपत्तियों को जब्त नहीं किया जा सकता।
बिना अनुमति जमी हुई संपत्ति का उपयोग स्थापित अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।
क्षेत्राधिकार का प्रश्न
डॉलर में रखी गई संपत्तियाँ अमेरिकी संस्थानों में होती हैं।
उनका हस्तांतरण केवल अमेरिकी कानूनी स्वीकृति से संभव है।
जारी कानूनी विवाद
रूस ने यूरोक्लियर के खिलाफ 230 अरब डॉलर का मुकदमा दायर किया है।
यूरोपीय संघ रूस की संपत्ति को यूक्रेन पुनर्निर्माण में लगाने पर विचार कर रहा है।
मिसाल बनने का खतरा:
यदि ऐसा किया गया—
भविष्य में अन्य देशों की संपत्तियाँ भी जब्त की जा सकती हैं
पश्चिमी वित्तीय प्रणाली में विश्वास कमजोर हो सकता है
भू-राजनीतिक प्रभाव:
रूस के लिए
स्वयं को शांति-स्थापक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास
अंतरराष्ट्रीय अलगाव से बाहर निकलने की रणनीति
गाज़ा मुद्दे पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश
जमी हुई संपत्तियों पर आंशिक नियंत्रण वापस पाने का प्रयास
संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए
मानवीय सहायता और प्रतिबंध नीति के बीच दुविधा
ट्रंप की भागीदारी से राजनीतिक जटिलता
यूरोप के लिए
अधिकांश संपत्तियाँ यूरोक्लियर के पास
कोई भी निर्णय यूरोपीय एकता को प्रभावित करेगा
रूस की जवाबी कार्रवाई का खतरा
यूक्रेन के लिए
रूस चाहता है कि कुछ धन उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में खर्च हो
इससे पश्चिम की यूक्रेन-केंद्रित नीति जटिल हो जाती है
रणनीतिक आयाम:
रूस वित्तीय कूटनीति को प्रभाव के हथियार के रूप में उपयोग कर रहा है
पश्चिम पर नैतिक दबाव बनता है:
अस्वीकार करने पर अमानवीय दिखेंगे
स्वीकार करने पर प्रतिबंध कमजोर पड़ेंगे
यह आधुनिक भू-राजनीति में वित्त के हथियारीकरण को दर्शाता है
यह दर्शाता है कि सैन्य शक्ति की जगह अब आर्थिक साधन अधिक प्रभावी हो रहे हैं
चुनौतियाँ और चिंताएँ:
संपत्ति स्वामित्व को लेकर कानूनी अनिश्चितता
क्षेत्रीय कब्जे को वैध ठहराने का खतरा
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध प्रणाली का कमजोर होना
मानवीय सहायता का राजनीतिक उपयोग
कूटनीतिक गतिरोध की संभावना
आगे की राह (Way Forward):
जमी हुई संप्रभु संपत्तियों के लिए स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय कानून
बहुपक्षीय सहमति से उपयोग का ढांचा
मानवीय सहायता को राजनीति से अलग रखना
वैश्विक वित्तीय शासन को मजबूत करना
शांति पहलों को निष्पक्ष और समावेशी बनाए रखना
निष्कर्ष:
ट्रंप की “बोर्ड ऑफ पीस” पहल के लिए रूस द्वारा जमी हुई संपत्तियों के उपयोग का प्रस्ताव कूटनीति, कानून और भू-राजनीति का जटिल मिश्रण है।
यद्यपि इसे मानवीय कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और प्रतिबंध नीति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
यह घटना दर्शाती है कि आज की बहुध्रुवीय दुनिया में आर्थिक शक्ति, कूटनीति और संघर्ष समाधान एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।