एन.एच.ए.आई. ए.आई.-संचालित डैशकैम निगरानी प्रणाली शुरू करेगा

एन.एच.ए.आई. ए.आई.-संचालित डैशकैम निगरानी प्रणाली शुरू करेगा

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Source: PIB| Date: March 20, 2026  

 

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 20 मार्च 2026 को भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लगभग 40,000 किलोमीटर पर AI-संचालित डैशकैम एनालिटिक्स सेवाओं (DAS) की तैनाती की घोषणा की है। यह पहल परंपरागत मानवीय सड़क निरीक्षण से स्वचालित, डेटा-आधारित प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।

रूट पेट्रोल वाहनों (RPV) पर विशेष डैशकैम लगाई जाएंगी जो साप्ताहिक सर्वेक्षण करेंगी। उन्नत AI/ML मॉडल 30 से अधिक प्रकार के सड़क दोषों को स्वचालित रूप से चिह्नित करेंगे, जिससे तेज़ रखरखाव प्रतिक्रिया, सड़क सुरक्षा में सुधार और संपत्ति प्रबंधन संभव होगा।

 

भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्कएक विशाल चुनौती

भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक है, जिसमें 2024 तक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1,46,000 किलोमीटर से अधिक विस्तृत हो चुका है। इतने विशाल अवसंरचना के रखरखाव का प्रबंधन आज तक मुख्यतः मानवीय निरीक्षणों, प्रतिक्रियाशील मरम्मत और आवधिक दृश्य सर्वेक्षणों के बल पर होता रहा है। ये तरीके समय-सापेक्ष, असंगत और संसाधन-गहन हैं।

मानसून जनित सड़क क्षति, भारी वाहनों से बढ़ा भार, अतिक्रमण और बढ़ते यातायात ने ओएंएम (O&M) को और जटिल बना दिया है। खराब सड़क सुरक्षा से दुर्घटनाएं, वाहन क्षति और आर्थिक नुकसान होता है — अनुमान है कि भारत में हर वर्ष डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवाते हैं।

 

पहल का विस्तृत विवरण

1. डैशकैम एनालिटिक्स सेवाएँ (DAS)

DAS पहल के अंतर्गत रूट पेट्रोल वाहनों (RPV) पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन डैशकैम लगाई जाएंगी। प्रत्येक राष्ट्रीय राजमार्ग खंड का साप्ताहिक सर्वेक्षण होगा। विशेष रूप से, मासिक रूप से कम से कम एक रात्रिकालीन सर्वेक्षण भी किया जाएगा, जो सड़क संकेतकों, पेवमेंट मार्किंग, रोड स्टड और राजमार्ग प्रकाश की रात्रिकालीन कार्यक्षमता का मूल्यांकन करेगा।

 

2. दोष तथा विसंगति तत्व की मुख्य श्रेणियाँ

पेवमेंट स्थिति निगरानी:

  • गड्ढों का पता लगाना — विभिन्न आकार और गंभीरता के गड्ढों की पहचान
  • रटिंग — भारी यातायात से उत्पन्न व्हील पाथ में लंबवत दबाव का पता लगाना
  • गंभीर दरारें — मगरमच्छी दरारें, लंबवत तथा अनुप्रस्थ दरारें

 

सड़क फर्नीचर मूल्यांकन:

  • क्षतिग्रस्त या धुंधली लेन मार्किंग की वास्तविक समय पहचान
  • क्रैश बैरियर की क्षति का पता लगाना
  • गैर-कार्यशील सड़क बत्तियों की पहचान

 

सुरक्षा एवं अतिक्रमण निगरानी:

  • अवैध मीडियन ओपनिंग — राजमार्ग के डिवाइडर में अनधिकृत कटान
  • अनधिकृत साइनबोर्ड — राजमार्ग गलियारे पर अवैध होर्डिंग
  • अवैध पार्किंग तथा अतिक्रमण

 

अन्य महत्वपूर्ण रखरखाव मुद्दे:

  • सड़क सतह पर जल जमाव
  • गायब या क्षतिग्रस्त ड्रेनेज कवर
  • पत्तेदार वनस्पति वृद्धि जो सड़क तक बढ़ जाए
  • बस बे और ले-बाय की दशा

 

3. जोनल संरचना

पूरे देश को पांच रणनीतिक आधार पर निर्मित जोनों में बांटा गया है — उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य। यह जोनल ढांचा डेटा निगरानी, क्षेत्रीय प्रतिक्रिया समन्वय और स्थानीयकृत रखरखाव योजना में सहायक होगा।

 

4. IT प्लेटफॉर्म और डेटा लेक एकीकरण

डेटा प्रबंधन, AI एनालिटिक्स और इंटरएक्टिव विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड के लिए समर्पित ऐडवांस्ड IT प्लेटफॉर्म विकसित की जाएगी। समय के साथ सड़क दशाओं की तुलनात्मक समीक्षा कि सुविधा NHAI को सड़क की स्थिति का सटीक अनुवर्तन करने की अनुमति देगी। AI-उत्पन्न संपूर्ण डेटा NHAI के केंद्रीय डेटा लेक प्लेटफॉर्म में एकीकृत होगा।

 

नीतिगत और रणनीतिक महत्व

प्रतिक्रियाशील से निरोधात्मक रखरखाव की ओर बदलाव

ऐतिहासिक रूप से भारत में राजमार्ग रखरखाव मुख्यतः प्रतिक्रियाशील रहा है — जब दोष स्पष्ट दिखते हैं तभी मरम्मत होती है। DAS पहल इस पैराडाइम को मूलरूप से बदलती है और पूर्वानुमानी और निरोधात्मक रखरखाव की ओर अग्रसर करती है। साप्ताहिक AI-सहायता प्राप्त सर्वेक्षणों से, दोषों को प्रारंभिक अवस्था में ही पहचाना संभव होगा।

 

कोन्त्राक्टर जवाबदेही सुनिश्चित करना

NHAI अधिकांश राजमार्गों का रखरखाव ठेकेदारों और रियायतदारों को आउटसोर्स करती है। AI-आधारित सर्वेक्षण डेटा कोन्त्राक्टरों के प्रदर्शन का एक वस्तुनिष्ठ मापदंड बनेगा। टाइम-स्टैम्प्ड, जियो-टैग्ड AI-सत्यापित दोष रिपोर्टसे ठेकेदारों के लिए रखरखाव दायित्वों को चुनौती देना मुश्किल होगा।

 

सड़क सुरक्षा में सुधार

भारत का सड़क सुरक्षा रिकॉर्ड चिंताजनक है — प्रति वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में जीवन खो देते हैं। DAS पहल सीधे तौर पर मुख्य योगदानकर्ता कारकों — खराब सड़क, धुंधली लेन मार्किंग, गैर-कार्यशील प्रकाश, क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर और अतिक्रमण — को संबोधित करती है।

 

चुनौतियाँ एवं संभावित जोखिम

डेटा गुणवत्ता और मॉडल सटीकता

AI/ML मॉडलों की प्रभावशीलता प्रशिक्षण डेटा की गुणवत्ता पर पूरी तरह निर्भर करती है। भारतीय सड़कें अत्यंत विविध परिस्थितियों — चरम मौसम, धूल, कोहरा, वर्षा, विविध सड़क प्रकार और मिश्र यातायात — से गुजरती हैं, जो कुछ मैदानी परिस्थितियों में मॉडल की सटीकता को कम कर सकती हैं।

 

कार्यान्वयन का पैमाना

40,000 किलोमीटर नेटवर्क पर एक साथ तैनाती एक दुर्जेय साजिशानी चुनौती है। हिमालय की तलहटी से तटीय सड़कों और मरुस्थलीय राजमार्गों तक, विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में सभी RPV को संरेखित करना और उनको संचालित रखना मजबूत कार्यान्वयन प्रबंधन की आवश्यकता होगी।

 

अंतिम कड़ीतत्काल मरम्मत

AI द्वारा दोषों की पहचान करना केवल पहला हिस्सा है। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर होगी कि AI-चिह्नित गड्ढों और दोषों को कितनी तेजी से ठीक किया जाता है। इसके लिए AI दोष रिपोर्टों से जुड़े स्पष्ट SLA और जवाबदेही तंत्र आवश्यक हैं।

 

अपेक्षित प्रभाव आकलन

अल्पकालिक — 1-2 वर्ष

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनदेखे गड्ढों की घटनाओं में कमी
  • O&M ठेकेदारों की वस्तुनिष्ठ निगरानी से अनुपालन में सुधार
  • व्यापक डिजिटल सड़क स्थिति डेटाबेस का निर्माण
  • अतिक्रमण और सुरक्षा जोखिम रिपोर्टों पर तत्काल प्रतिक्रिया

 

मध्यकालिक — 3-5 वर्ष

  • राष्ट्रीय राजमार्ग पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स (PCI) स्कोर में मापनीय सुधार
  • सड़क दुर्घटनाओं में संभावित कमी
  • AI विश्लेषण के आधार पर पूर्वानुमानी रखरखाव शेड्यूलिंग का विकास
  • कुल O&M लागत में कमी

 

दीर्घकालिक — 5+ वर्ष

  • AI-संचालित राजमार्ग प्रबंधन में वैश्विक बेंचमार्क
  • राज्य राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों तक विस्तार की संभावना
  • सड़क निर्माण मानकों की डेटा-आधारित समीक्षा
  • स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पूर्ण एकीकरण

 

निष्कर्ष एवं संपादकीय दृष्टिकोण

NHAI की AI-संचालित डैशकैम एनालिटिक्स पहल एक सुविचारित और समयोचित हस्तक्षेप है जो भारत की राजमार्ग प्रबंधन क्षमता में वास्तविक कमी को दूर करती है। दुर्घटनाओं और खराब सड़कों से होने वाले विशाल मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को देखते हुए, दोषों के तेज़ पतालगान और तत्काल सुधार की कोई भी प्रणाली स्वागत योग्य है।

पहल की विशेषताँ AI/ML तकनीक के सिद्ध उपयोग, व्यवस्थित सर्वेक्षण आवृत्ति, केंद्रीय डेटा प्रणालियों के साथ एकीकरण, डे और नाइट दोनों प्रदर्शन निगरानी हैं। पांच ज़ोन निगरानी ढांचा भी वास्तविक कार्यान्वयन योजना को दर्शाता है।

यदि NHAI इस चक्र को प्रभावी ढंग से बंद कर सकती है, तो DAS पहल वास्तव में जानें बचा सकती है, वाहन क्षति लागत घटा सकती है और भारत में डेटा-संचालित अवसंरचना शासन के लिए नए मानक स्थापित कर सकती है। इस पहल का सफल कार्यान्वयन विकासशील विश्व के अन्य देशों के लिए ऐसी सेवाओं के लिए एक मूल्यवान प्रमाण हो सकता है।

यह विश्लेषण 20 मार्च 2026 की आधिकारिक PIB प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। विचार संपादकीय प्रकृति के हैं और NHAI अथवा भारत सरकार का अधिकारिक पक्ष नहीं दर्शाते।

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