बिहार का आधुनिक इतिहास

बिहार का आधुनिक इतिहास

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यूरोपियों का आगमन

 

पुर्तगाली

  • बिहार में आने वाले पहले यूरोपीय।
  • व्यापार: मसाले, वस्त्र।
  • मुख्य केंद्र:
    • हुगली फैक्टरी (1579–80)
    • बैंडेल चर्च (1599)

 

ब्रिटिश (अंग्रेज़)

  • पटना, आलमगंज फैक्टरी (1620) — 1651 में पुनः शुरू; वर्तमान में गुलज़ारबाग सरकारी प्रेस

 

डच

  • व्यापार: कपास, साल्टपीटर, अनाज
  • पटना फैक्टरी (1632) — वर्तमान पटना कलेक्ट्रिएट

 

डेनिश

  • पटना, नेपाली कोठी फैक्टरी (1774)

 

बक्सर का युद्ध (1764)

  • पक्ष: अंग्रेज़ (हेक्टर मनरो) vs मुगल सम्राट, अवध नवाब, बंगाल नवाब।
  • परिणाम: अंग्रेज़ों की निर्णायक विजय।
  • संधियाँ:
    • मुगलों से — 12 अगस्त 1765
    • अवध से — 16 अगस्त 1765
  • प्रशासनिक कदम:
    • पटना में डिप्टी गवर्नर और राजस्व परिषद (1770)
    • 1781 तक बिहार का मुख्य राजस्व प्रमुख बनाया गया।

 

अकाल और आधारभूत संरचना

  • 1770 और 1783 — बिहार और बंगाल में भीषण अकाल।
  • गोलघर (1786) — कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा अनाज भंडारण हेतु निर्मित।

 

स्थायी बंदोबस्त / ज़मींदारी व्यवस्था

  • आरंभ: लॉर्ड कॉर्नवालिस, वास्तुकार: जॉन शोर
  • ज़मींदारों को भूमि स्वामित्व
  • कर विभाजन: ज़मींदार 1/11, शेष ब्रिटिश सरकार के लिए

 

1857 का विद्रोह (बिहार)

  • शुरुआत: देवघर (12 जून 1857)
  • फैलाव: पटना, दानापुर
  • प्रमुख नेता: बाबू कुंवर सिंह (80 वर्ष की उम्र में 4000 सैनिकों के साथ नेतृत्व)

 

ब्रिटिश शासन में बिहार

  • पटना बन गया शिक्षा और व्यापार का प्रमुख केंद्र
  • प्रशासनिक परिवर्तन:
    • 1912: बिहारउड़ीसा प्रांत, राजधानी पटना
    • 1936: GOI Act 1935 के अनुसार बिहार और उड़ीसा अलग प्रांत बने
  • प्रमुख शैक्षणिक संस्थान:
    • पटना कॉलेज
    • पटना साइंस कॉलेज
    • बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज\
    • प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज
    • पटना वेटनरी कॉलेज

 

वहाबी आंदोलन (1828–1868)

  • उद्देश्य: ब्रिटिश अत्याचार का विरोध
  • प्रेरणा: अब्दुल वहाब (सऊदी), शाह वलीउल्लाह (दिल्ली)
  • केंद्र: पटना
  • नेता: हाजी शरियतुल्लाह

 

क्रांतिकारी आंदोलन

  • अनुशीलन समिति (1913), पटना — नेता: सचिंद्रनाथ सान्याल, बंकिमचंद्र मित्र
  • हिंदू बॉयज़ एसोसिएशन — विवेकानंद के विचारों का प्रचार
  • बनारस षड्यंत्र केस (1915) — सान्याल और मित्र शामिल
  • युवा संगठनों की स्थापना:
    • पटना युवक संघ (1927)
    • बिहार युवक संघ (1928, मोतिहारी)
    • पाटलिपुत्र युवक संघ (1929, पटना)
    • पत्रिका: युवक
  • महिला क्रांतिकारी: कुसुम कुमारी देवी, गौरी दास
  • सीमाएँ: धार्मिक झुकाव, सीमित जनसहभागिता, सरकारी दमन

 

होम रूल लीग (बिहार)

  • स्थापना: 16 दिसंबर 1916, बांकीपुर, पटना
  • अध्यक्ष: मज़रुल हक़
  • उपाध्यक्ष: सरफ़राज़ हुसैन खान, पूर्णेंदु नारायण सिन्हा
  • सचिव: चंद्रवंशी सहाय, बैजनाथ नारायण सिंह
  • अन्य नेता: हसन इमाम, सच्चिदानंद सिन्हा

 

चम्पारण सत्याग्रह (1917)

  • गांधीजी का पहला सत्याग्रह
  • मुद्दा: टिंकठिया प्रथा (जबरन नील की खेती)
  • स्थानीय नेता: राजकुमार शुक्ल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ज.ब. कृपलानी, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा
  • परिणाम: किसानों को 25% मुआवज़ा

 

असहयोग आंदोलन (1920–22)

  • कारण: जलियांवाला बाग, खिलाफत, रॉलेट एक्ट
  • बिहार के प्रमुख नेता: जे.पी. नारायण, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, धारणीधर प्रसाद, शाह मोहम्मद जुबैर, मज़हरुल हक़
  • बिहार विद्यापीठ (1922) — गांधी द्वारा उद्घाटन
  • अखबार: मदर लैंड (1921)
  • प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन का विरोध

 

स्वराज्यवादी आंदोलन (1923)

  • संस्थापक: सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू
  • बिहार में "स्वराज दल" — संस्थापक: श्री कृष्ण सिंह
  • अध्यक्ष: श्री नारायण प्रसाद
  • सचिव: अब्दुल बारी
  • 1923 चुनाव: 8 विधानसभा + 10 परिषद सीटें

 

साइमन कमीशन का विरोध (1928)

  • ऑल-पार्टी मीटिंग — नेतृत्व: अनुग्रह नारायण सिंह
  • कमीशन का पटना आगमन: 12 दिसंबर 1928

 

बहिष्कार आंदोलन

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
  • खादी प्रचार — गाँवों में "मैजिक लैम्प"
  • हस्ताक्षर अभियान

 

पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव (1930)

  • तिथि: 20 जनवरी 1930
  • बिहार कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया

 

नमक सत्याग्रह व सविनय अवज्ञा (1930)

  • मसौदा: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • आरंभ: 6 अप्रैल 1930
  • नेहरू का बिहार दौरा: 31 मार्च–3 अप्रैल
  • प्रमुख स्थान और नेता:
    • पटना (नखास पिंड): अम्बिका कांत सिंह
    • मुंगेर: श्री कृष्ण सिंह
    • लखीसराय: नंद कुमार सिंह
    • छपरा जेल: विदेशी वस्त्र का विरोध
    • दरभंगा: सत्यनारायण सिंह

 

किसान सभा एवं किसान आंदोलन

  • 1922: मुहम्मद जुबैर और श्री कृष्ण सिंह — मुंगेर किसान सभा
  • 1929: बिहार प्रांतीय किसान सभा — स्वामी सहजानंद सरस्वती
  • ज़मींदारों ने बनाई United Political Party
  • 1936: अखिल भारतीय किसान सभा, लखनऊ
    • अध्यक्ष: सहजानंद सरस्वती
    • सचिव: एन.जी. रांगा
  • साप्ताहिक पत्र: हुंकार (1940) — यमुना कार्जे, राहुल सांकृत्यायन
  • प्रमुख किसान आंदोलन:
    • मधुबनी — स्वामी विद्यानंद
    • हिलसा (1920) — जगन्नाथ पाठक
    • मुंगेर — मुहम्मद जुबैर, श्री कृष्ण सिंह

 

समाजवादी आंदोलन

  • बिहार समाजवादी पार्टी (1931): गंगा शरण सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी
  • कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (1934, पटना)
    • अध्यक्ष: आचार्य नरेन्द्र देव
    • महासचिव: जयप्रकाश नारायण

 

पहली कांग्रेस सरकार (1937–38)

  • GOI Act 1935 के अनुसार प्रांतीय स्वायत्तता
  • 1937 चुनाव: कांग्रेस बहुमत होने पर भी सरकार बनाने से इंकार
  • मोहम्मद यूनुस — बिहार के पहले Premier
  • बाद में श्री कृष्ण सिंह की सरकार (त्यागपत्र–पुनः ग्रहण)

 

भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

  • योजना: डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 31 जुलाई 1942 को तैयार की
  • व्यापक विरोध और झंडा फहराना
  • दमन: W.C. Archer

 

अगस्त क्रांति के दौरान गिरफ्तार प्रमुख नेता

नेता का नाम

गिरफ्तारी स्थान

राजेंद्र प्रसाद

बैंकिपुर

श्रीकृष्ण सिंह

बैंकिपुर

अनुग्रह नारायण सिंह

बैंकिपुर

जयप्रकाश नारायण

हजारीबाग

योगेंद्र शुक्ल

बक्सर

 

श्रम आंदोलन

  • मुख्य हड़तालें: डालमियानगर, गया कॉटन मिल, टाटानगर फाउंड्री, जापान सीमेंट (1937–38)
  • बिहार ट्रेड यूनियन कांग्रेस — गिरीडीह, 10 जून 1944
  • CPI श्रम सम्मेलन — पटना, 17–20 जून 1947

बिहार के प्रमुख जनजातीय विद्रोह

विद्रोह

तिथि / अवधि

नेता

उद्देश्य

हो एवं मुंडा विद्रोह

1820, 1827, 1899–1900, 1860–1920

राजा पर्हाट

ब्रिटिश भूमि-राजस्व नीति के विरुद्ध

कोल विद्रोह

1831–32

बुधु भगत, विंदा राय, सुरगा मुंडा

कोल भूमि पर ब्रिटिश विस्तार और बाहरी लोगों को भूमि हस्तांतरण के विरुद्ध

भूमिज विद्रोह

1832–33

गंगा नारायण

ब्रिटिश भूमि-राजस्व नीति के विरुद्ध

संथाल विद्रोह

1855–56

सिद्धू, कान्हू, भैरव, चाँद

जमींदारों और साहूकारों के शोषण के विरुद्ध

सफा होर विद्रोह

1870

बाबा भागीरथ मांझी, लाल हेम्ब्रम, पैका मुर्मू

धार्मिक भावनाओं पर ब्रिटिश प्रतिबंधों के विरुद्ध

मुंडा विद्रोह

1899–1900

बिरसा मुंडा

वन विनियम अधिनियम 1865 के कारण जनजातीय भूमि के हरण के विरुद्ध

 

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