जापान AI बूम, ऊर्जा योजना पर दीर्घकालिक LNG सौदों पर वापस आ गया:

जापान AI बूम, ऊर्जा योजना पर दीर्घकालिक LNG सौदों पर वापस आ गया:

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द हिंदू: 20 जून 2025 को प्रकाशित:

 

समाचार में क्यों? 

जापान एक दशक बाद फिर से दीर्घकालिक एलएनजी (LNG) समझौतों की ओर लौट रहा है। इसके पीछे कारण हैं:

AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा मांग,

हरित ईंधनों (हाइड्रोजन, अमोनिया) की बढ़ती लागत,

और फरवरी 2024 में जारी नई राष्ट्रीय ऊर्जा योजना,

जिसमें गैस को एक संक्रमणकालीन ईंधन के रूप में मान्यता दी गई है।

 

पृष्ठभूमि:

2011 की फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद जापान ने LNG आयात बढ़ाया था।

धीरे-धीरे परमाणु संयंत्रों के पुनः संचालन और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ोतरी से LNG आयात में गिरावट आई।

पहले की शुद्ध-शून्य उत्सर्जन पर केंद्रित ऊर्जा नीति के कारण कंपनियां दीर्घकालिक LNG समझौते करने से बच रही थीं।

 

मुख्य मुद्दे:

AI आधारित डेटा सेंटर्स अत्यधिक बिजली खपत कर रहे हैं, जिससे मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है।

हाइड्रोजन व अमोनिया जैसे ईंधन वर्तमान में अत्यधिक महंगे साबित हो रहे हैं।

ऊर्जा की सुरक्षा, कीमतों में अस्थिरता, और आपूर्ति व्यवधान के जोखिमों ने LNG की मांग को मजबूती दी है।

 

रणनीतिक बदलाव:

जापान ने:

कोयला आधारित संयंत्रों की जगह गैस संयंत्रों के लिए 7 गीगावॉट क्षमता की नीलामी की है।

2024 के 79.98 GW से 2034 तक LNG संयंत्र क्षमता 85.75 GW करने की योजना है।

डेटा सेंटरों की बिजली खपत में 2030 तक 80% वृद्धि की भविष्यवाणी है।

दीर्घकालिक LNG समझौतों के लिए सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा दिया है।

 

आर्थिक और ऊर्जा प्रभाव:

2030 तक 78 मिलियन टन LNG आयात की संभावना (Morgan Stanley)।

डिजिटल विकास के बीच बिजली की विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

यह ऊर्जा संक्रमण को स्थिर और व्यावहारिक बनाता है, आर्थिक झटकों से बचाता है।

निवेशकों में आश्वस्ति और स्थिरता बढ़ती है।

 

भू-राजनीतिक प्रभाव:

जापान विविध स्रोतों से गैस खरीद रहा है:

अबू धाबी (ADNOC) से 15 साल का करार (Osaka Gas)।

U.S. Energy Transfer से पहला दीर्घकालिक समझौता (Kyushu Electric)।

JERA ने अमेरिका की चार कंपनियों से 20 वर्ष के चार समझौते किए।

इससे जापान की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होती है।

 

पर्यावरण और नीति दृष्टिकोण:

  • यह ऊर्जा नीति में यथार्थवादी सोच दिखाता है – जब तक हरित तकनीकें पूरी तरह व्यावहारिक नहीं होतीं, तब तक LNG एक व्यवहार्य विकल्प है।
  • यह जापान के 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य में भी सहायक है।
  • यह वैश्विक स्तर पर "ऊर्जा सुरक्षा बनाम जलवायु लक्ष्य" के संतुलन को दर्शाता है।
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