भारतीय विमानन सुरक्षा: बढ़ता हुआ खतरनाक विश्वसनीयता संकट

भारतीय विमानन सुरक्षा: बढ़ता हुआ खतरनाक विश्वसनीयता संकट

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द हिंदू  प्रकाशित: 6 जनवरी 202

 

क्यों चर्चा में है

12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हुई एयर इंडिया फ़्लाइट 171 की जाँच 2026 तक खिंच गई है, जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पारदर्शिता का आश्वासन दिया था। मीडिया लीक से भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी बोर्ड (NTSB) के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के पालन और भारत की वैश्विक विमानन विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

एआई-171 दुर्घटना: क्या हुआ

12 जून 2025 को एयर इंडिया फ़्लाइट 171 (बोइंग 787 ड्रीमलाइनर) अहमदाबाद से टेक-ऑफ के एक मिनट के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

  • मृतक संख्या: विमान में सवार 242 में से 241 यात्रियों की मौत, ज़मीन पर 19 लोगों की मृत्यु
  • महत्व: पिछले एक दशक में भारत की सबसे घातक विमान दुर्घटना

दुर्घटना उड़ान के सबसे संवेदनशील चरण में हुई, जिससे विमान प्रणालियों, पायलट कार्रवाई और नियामक निगरानी पर गंभीर सवाल उठे।

 

जाँच की स्थिति और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताएँ

  • कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) 16 जून 2025 तक बरामद कर NTSB की मदद से डिकोड किए गए।
  • AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट (जुलाई 2025) में टेक-ऑफ के कुछ सेकंड बाद ईंधन स्विच के अनपेक्षित बदलाव और पायलट की उलझन दर्शाने वाली ऑडियो का उल्लेख है।
  • किसी भी यांत्रिक कारण या निर्णायक विश्लेषण को सार्वजनिक नहीं किया गया।
  • अंतिम रिपोर्ट ICAO द्वारा सुझाई गई समयसीमा से आगे खिसक गई।

जुलाई और नवंबर 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्टों में भारतीय और अमेरिकी जाँच एजेंसियों के बीच निष्कर्षों को “नरम करने” को लेकर टकराव सामने आया।

 

ICAO दायित्व और भारत का सुरक्षा रिकॉर्ड

भारत ICAO का हस्ताक्षरकर्ता है और एनेक्स-13 के तहत निम्न दायित्वों से बंधा है:

  • स्वतंत्र दुर्घटना जाँच
  • तथ्यात्मक जानकारी का समयबद्ध प्रकटीकरण
  • साक्ष्यों की सुरक्षा और पारदर्शिता

हालाँकि:

  • भारत का ICAO यूनिवर्सल सेफ़्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम (USOAP) स्कोर 2024 में भी 65–70% पर स्थिर रहा।
  • यह तब चिंताजनक है जब भारत सालाना 15 करोड़ से अधिक हवाई यात्रियों को संभालता है।

पूर्व ICAO नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि एक देश में पारदर्शिता की कमी वैश्विक विमानन सुरक्षा को कमजोर करती है।

 

दुर्घटना के बाद प्रक्रियात्मक चूक

अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं से गंभीर विचलन देखे गए:

  • दुर्घटना स्थल को ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया
  • मलबे तक मीडिया की पहुँच
  • रेस्क्यू और फायर फाइटिंग सेवाएँ पूरी तरह बहाल हुए बिना 3 घंटे में हवाई अड्डा खोल दिया गया
  • AAIB प्रमुख को सशस्त्र सुरक्षा प्रदान की गई, जो जाँच की संवेदनशीलता दर्शाती है

ये सभी कदम अंतरराष्ट्रीय दुर्घटना प्रबंधन मानकों के विपरीत थे।

 

विमान में प्रणालीगत खामी के प्रमाण नहीं

अटकलों के बावजूद:

  • अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बोइंग 787 विमानों को ग्राउंड नहीं किया।
  • इससे यह संकेत मिलता है कि कोई वैश्विक डिज़ाइन या निर्माण दोष नहीं है।
  • तोड़फोड़ या प्रणालीगत विफलता के दावे नियामक कार्रवाई से समर्थित नहीं हैं।

 

सुरक्षा विफलताओं का दोहराता इतिहास

भारत की विमानन सुरक्षा में लगातार समस्याएँ रही हैं:

  • मैंगलोर दुर्घटना (2010): रनवे सुरक्षा और पायलट थकान के मुद्दे दबा दिए गए।
  • कोझिकोड दुर्घटना (2020): टेबल-टॉप रनवे के जोखिमों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
  • सुधारात्मक कदमों और नियामक सुधारों में देरी होती रही।

क्रू ड्यूटी टाइम जैसे महत्वपूर्ण सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CARs) में 15 वर्षों से ठोस संशोधन नहीं हुआ।

 

नियामक कमजोरी और राजनीतिक हस्तक्षेप

  • DGCA को ICAO ऑडिट में बार-बार कमजोर प्रवर्तन के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है।
  • नियामक फैसले अक्सर एयरलाइंस और राजनीतिक दबाव से प्रभावित होते हैं।
  • आधिकारिक चुप्पी के कारण सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैली, जिससे जनता का भरोसा और कमजोर हुआ।

 

वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ: एक तुलना

इसके विपरीत:

  • नवंबर 2025 में अमेरिका में UPS MD-11 दुर्घटना के बाद NTSB ने रोज़ाना ब्रीफिंग दी।
  • FAA ने कुछ ही दिनों में संबंधित विमान को ग्राउंड कर दिया।
  • पारदर्शी संवाद से अटकलों पर रोक लगी और संस्थागत विश्वास मजबूत हुआ।

भारत यदि इसी स्तर की पारदर्शिता नहीं अपनाता, तो ICAO की सख़्त निगरानी और कूटनीतिक लागत का जोखिम बढ़ेगा।

 

आगे का रास्ता: भरोसा और सुरक्षा की पुनर्बहाली

विश्वसनीयता बहाल करने के लिए आवश्यक कदम:

  • स्वतंत्र और समयबद्ध दुर्घटना जाँच सुनिश्चित करना
  • राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना तथ्यात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक करना
  • रनवे सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करना
  • क्रू विश्राम और संचालन सुरक्षा नियमों को सख़्ती से लागू करना
  • वैश्विक विमानन सुरक्षा एजेंसियों के साथ संस्थागत सहयोग बढ़ाना

 

निष्कर्ष

विमानन में पारदर्शिता कोई विकल्प नहीं, बल्कि सुरक्षा की बुनियाद है। जैसे-जैसे भारत का हवाई यातायात बढ़ रहा है, देरी, अपारदर्शिता और नियामक ढिलाई भविष्य की दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाती है। विमानन सुरक्षा शासन में विश्वसनीयता की कमी को दूर करना न केवल यात्रियों के विश्वास के लिए, बल्कि वैश्विक विमानन व्यवस्था में भारत की साख बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।

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