भारत–यूरोपीय संघ संयुक्त वक्तव्य (16वां भारत–ईयू शिखर सम्मेलन, जनवरी 2026)

भारत–यूरोपीय संघ संयुक्त वक्तव्य (16वां भारत–ईयू शिखर सम्मेलन, जनवरी 2026)

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विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक वेबसाइट | प्रकाशित: 27 जनवरी 2026

 

क्यों चर्चा में है?

16वां भारतयूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह सम्मेलन यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान संपन्न हुआ। दोनों नेताओं को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, जो पहली बार था जब यूरोपीय संघ के नेतृत्व को संयुक्त रूप से यह सम्मान दिया गया।

इस शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणामों में भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का समापन, भारत–ईयू सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर तथा “2030 की ओर: भारतईयू संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा को अपनाया जाना शामिल है।

 

पृष्ठभूमि एवं रणनीतिक महत्व

पिछले एक दशक में वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों, आपूर्ति शृंखला व्यवधानों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बढ़ते अभिसरण के कारण भारत–ईयू संबंधों में उल्लेखनीय गति आई है। यह शिखर सम्मेलन यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों, जलवायु चुनौतियों और मजबूत आर्थिक साझेदारियों की आवश्यकता की पृष्ठभूमि में आयोजित हुआ। यह यात्रा भारत–ईयू संबंधों की परिपक्वता को दर्शाती है तथा बहुध्रुवीय, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

 

राजनीतिक एवं कूटनीतिक महत्व

शिखर सम्मेलन में लोकतंत्र, बहुलवाद, विधि का शासन तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान जैसे साझा मूल्यों की पुनः पुष्टि की गई। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया तथा समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता दोहराई। नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और संस्थागत तंत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

 

आर्थिक एवं व्यापार सहयोग

शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि भारतईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सफल वार्ता का समापन रहा। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और विविध एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। दोनों पक्षों ने समझौते के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन तथा निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत (GI) समझौते पर वार्ताओं को शीघ्र पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।

 

निवेश एवं वैश्विक मूल्य शृंखलाएँ

नेताओं ने द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। चयनित मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए ब्लू वैलीज़” पर चर्चा आरंभ की गई। भारत और ईयू ने तीसरे देशों में त्रिपक्षीय सहयोग के माध्यम से निवेश बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जिसमें भारत की विकास साझेदारियों और ईयू की ग्लोबल गेटवे रणनीति का लाभ मिलेगा।

 

सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी

भारतईयू सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही। यह समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग एवं प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष सुरक्षा तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। सुरक्षा सूचना समझौते पर वार्ता आरंभ करने से गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और रणनीतिक विश्वास को बल मिलेगा।

 

आतंकवाद-रोधी एवं सुरक्षा सहयोग

दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों, विशेष रूप से सीमा-पार आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की। कट्टरपंथ, आतंकवाद के वित्तपोषण और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम तथा नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुए आतंकवादी हमलों की निंदा करते हुए वैश्विक आतंकवाद से निपटने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

 

क्षेत्रीय एवं इंडो-पैसिफिक सहयोग

शिखर सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक अभिसरण को रेखांकित किया गया। भारत और ईयू ने अंतरराष्ट्रीय कानून एवं UNCLOS के अनुरूप स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। भारत–ईयू इंडो-पैसिफिक परामर्श और इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव तथा IORA के तहत सहयोग का स्वागत किया गया।

 

वैश्विक एवं क्षेत्रीय संघर्ष

नेताओं ने यूक्रेन युद्ध पर चिंता व्यक्त करते हुए संवाद और कूटनीति के माध्यम से न्यायसंगत और स्थायी शांति का समर्थन किया। पश्चिम एशिया में गाजा संघर्ष को समाप्त करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 का स्वागत किया गया और दो-राज्य समाधान के समर्थन की पुनः पुष्टि की गई। ईरान और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया गया।

 

प्रौद्योगिकी एवं इनोवेशन सहयोग

भारत और ईयू ने प्रौद्योगिकी एवं इनोवेशन में अपनी पूरक क्षमताओं को स्वीकार किया। व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) को उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग का मुख्य मंच बनाए रखने पर सहमति बनी। सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 6G और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा किया जाएगा।

 

अनुसंधान, अंतरिक्ष एवं स्टार्ट-अप सहयोग

भारत–ईयू वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते को 2030 तक नवीनीकृत किया गया। ईयूभारत इनोवेशन हब और स्टार्ट-अप साझेदारी शुरू करने पर सहमति बनी। होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी पर प्रारंभिक वार्ता तथा अंतरिक्ष संवाद को भी बल मिला।

 

जलवायु कार्रवाई एवं सतत विकास

जलवायु परिवर्तन सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा। दोनों पक्षों ने पेरिस समझौते और वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने समानता और साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों पर जोर दिया। भारत और यूरोपीय संघ ने नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा लचीलेपन सहित स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु साझेदारी के तहत त्वरित सहयोग के लिए प्रतिबद्धता जताई।

 

स्वच्छ ऊर्जा एवं आपदा प्रबंधन

ग्रीन हाइड्रोजन पर भारत–ईयू टास्क फोर्स और 2026 में पवन ऊर्जा शिखर सम्मेलन की घोषणा की गई। आपदा जोखिम प्रबंधन पर प्रशासनिक व्यवस्था से आपदा-पूर्व तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी।

 

पर्यावरण एवं जैव विविधता सहयोग

शिखर सम्मेलन ने पर्यावरणीय स्थिरता पर गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों पक्षों ने चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं, जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और समुद्री संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता जताई। महासागर और मत्स्य पालन संवाद की शुरुआत और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे की पुनः पुष्टि ने साझा पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को उजागर किया।

 

कनेक्टिविटी एवं अवसंरचना

भारत–ईयू कनेक्टिविटी साझेदारी के तहत उच्च मानकों के साथ अवसंरचना परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे में प्रगति और विमानन एवं समुद्री परिवहन सहयोग को बल मिला।

 

गतिशीलता, शिक्षा एवं जन-जन संपर्क

जन-जन संपर्क को रणनीतिक साझेदारी का आधार माना गया। भारत–ईयू व्यापक गतिशीलता ढांचे, यूरोपीय लीगल गेटवे कार्यालय और कौशल विकास, शिक्षा एवं योग्यता मान्यता में सहयोग को बढ़ावा दिया गया।

 

आगे की राह

“भारत–ईयू संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा 2030” पाँच प्रमुख स्तंभों के माध्यम से भविष्य का रोडमैप प्रदान करता है। प्रभावी कार्यान्वयन, संस्थागत समन्वय और सतत राजनीतिक प्रतिबद्धता इस साझेदारी की सफलता के लिए निर्णायक होगी। ब्रुसेल्स में 17वें भारत–ईयू शिखर सम्मेलन का निमंत्रण इस साझेदारी की निरंतरता और विश्वास को दर्शाता है।

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