ह्यूमन राइट्स वॉच की वर्ल्ड रिपोर्ट 2023

ह्यूमन राइट्स वॉच की वर्ल्ड रिपोर्ट 2023

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स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी वर्ल्ड रिपोर्ट 2023 (33वाँ संस्करण) में कहा कि भारतीय अधिकारियों ने वर्ष 2022 के दौरान कार्यकर्त्ता समूहों एवं मीडिया पर अपनी कार्यवाही को अधिक "तीव्र और व्यापक" कर दिया।

इसमें यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान केंद्रीय सत्तारूढ़ पार्टी ने अल्पसंख्यकों को दबाने हेतु अपमानजनक और भेदभावपूर्ण नीतियों का इस्तेमाल किया।

ह्यूमन राइट्स वॉच क्या है?

  1. ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 1978 में "हेलसिंकी वॉच" के रूप में हुई थी, शुरू में इसका उद्देश्य हेलसिंकी समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अधिकारों के हनन की जाँच करना था।  
  2. वर्तमान में इसका दायरा दुनिया भर के लगभग 100 देशों में विस्तारित हो गया है। 
  3. इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर में स्थित है।
  4. हेलसिंकी समझौता (1975), यूरोप में सुरक्षा और सहयोग पर पहले सम्मेलन (अब यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन) के समापन पर हेलसिंकी, फिनलैंड में हस्ताक्षरित एक प्रमुख राजनयिक समझौता था। 
  5. मुख्य रूप से सोवियत और पश्चिमी ब्लॉक के बीच तनाव को कम करने हेतु हेलसिंकी समझौते पर कनाडा, अमेरिका एवं यूरोप के सभी देशों द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे।  
  6. समझौते के तहत 35 हस्ताक्षरकर्त्ता देशों ने मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता का सम्मान करने का वचन दिया था।

वर्ल्ड रिपोर्ट 2023 के भारत विशिष्ट निष्कर्ष: 

सरकार द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन:

  • रिपोर्ट में पाया गया कि केंद्र सरकार हिंदू बहुसंख्यक विचारधारा को बढ़ावा दे रही है तथा अधिकारियों और समर्थकों को धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने एवं कभी-कभी हिंसक कार्रवाई हेतु भी उकसाती है।
  • इसने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति सरकार के भेदभावपूर्ण रुख (बिलकिस बानो बलात्कार के दोषियों की रिहाई) को उजागर किया है।
  • अनुच्छेद 370 को हटाने तथा बाद में दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) के निर्माण के 3 साल पश्चात् भी "सरकार ने दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में स्वतंत्र अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण समागम को प्रतिबंधित करना जारी रखा" है।
  • प्राधिकारी वर्गों ने पत्रकारों और कार्यकर्त्ताओं को "मनमाने ढंग से" हिरासत में लेने के लिये जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (J&K Public Safety Act) एवं गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act- UAPA), 1967 का भी इस्तेमाल किया।
  • इसने कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदायों पर संदिग्ध आतंकवादी हमलों का भी उल्लेख किया है।  

सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का स्वागत:

HRW ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए त्वरित उदार कदमों की सराहना की, जैसे औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून के सभी उपयोग को रोकने का निर्णय।

इसने वैवाहिक स्थिति की परवाह किये बिना सभी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार देने तथा समान-लिंग वाले युगल, एकल माता-पिता और अन्य परिवारों को शामिल करने हेतु परिवार की परिभाषा को व्यापक बनाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी उल्लेख किया।

हालाँकि शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम छात्राओं के हिज़ाब पहनने के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय किसी निर्णय पर नहीं पहुँचा।

मानवाधिकारों के लिये भारत की पहलें:

संविधान में प्रावधान: 

मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 14 से 32

राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत: संविधान के अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक। इसमें सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, काम का अधिकार, रोज़गार चयन का अधिकार, बेरोज़गारी के विरुद्ध सुरक्षा, समान काम तथा समान वेतन का अधिकार, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार एवं मुफ्त कानूनी सलाह का अधिकार आदि शामिल हैं।

सांविधिक प्रावधान:

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (PHRA), 1993 (वर्ष 2019 में संशोधित): NHRC की स्थापना इसी अधिनियम के तहत की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भूमिका:

भारत ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) के प्रारूपण में सक्रिय रूप से भाग लिया।

भारत ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (ICESCR) तथा नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (ICCPR) का भी अनुसमर्थन किया है।

अन्य समान रिपोर्ट:

  • भारत- 2021 पर मानवाधिकार रिपोर्ट (अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा)।
  • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2021 रिपोर्ट (अमेरिका स्थित फ्रीडम हाउस द्वारा)।
  • डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2022 (यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग, स्वीडन में वी-डेम इंस्टीट्यूट द्वारा)।
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