द हिंदू: 2 जनवरी 2026 को प्रकाशित:
चर्चा में क्यों?
अमेरिकी डॉलर आठ वर्षों में अपने सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन के बाद चर्चा में है। वर्ष 2025 में डॉलर 9% से अधिक गिर गया। हालाँकि अल्पकालिक स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन निवेशकों का व्यापक मानना है कि 2026 में डॉलर और कमजोर होगा, जिसका कारण संभावित फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, वैश्विक आर्थिक वृद्धि के अंतर में कमी और मौद्रिक नीति की बदलती दिशा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ:
अमेरिकी डॉलर की वैश्विक वित्त, व्यापार, विदेशी मुद्रा भंडार और पूंजी प्रवाह में केंद्रीय भूमिका है।
पिछले कुछ वर्षों में डॉलर मजबूत बना रहा, इसके प्रमुख कारण थे:
फेडरल रिज़र्व द्वारा आक्रामक ब्याज दर बढ़ोतरी
अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बेहतर वृद्धि
लेकिन 2025 में यह रुझान उलट गया, क्योंकि:
महँगाई में कमी आई
फेड ने मौद्रिक ढील (Monetary Easing) के संकेत दिए
अन्य अर्थव्यवस्थाओं में रिकवरी के संकेत दिखने लगे
डॉलर की कमजोरी के प्रमुख कारण:
(a) फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती
फेड पहले ही दरों में कटौती कर चुका है और 2026 में और कटौती की उम्मीद है।
कम ब्याज दरें डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर रिटर्न घटाती हैं, जिससे विदेशी निवेश हतोत्साहित होता है।
ब्याज दर अंतर कम होने से डॉलर की माँग घटती है।
(b) डॉलर का अधिक मूल्यांकन (Overvaluation)
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के अनुसार:
डॉलर की वास्तविक प्रभावी विनिमय दर ऐतिहासिक रूप से अभी भी ऊँची है।
इससे संकेत मिलता है कि डॉलर अब भी अधिक मूल्यांकित है।
बाज़ार रणनीतिकारों का मानना है कि और सुधार (Correction) की संभावना बनी हुई है।
(c) राजकोषीय घाटा और राजनीतिक अनिश्चितता
बढ़ता हुआ अमेरिकी राजकोषीय घाटा और राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर की दीर्घकालिक मजबूती पर भरोसा कम करती है।
नए फेड चेयरमैन की संभावना से नरम (Dovish) मौद्रिक नीति की अटकलें बढ़ी हैं।
वैश्विक आर्थिक वृद्धि का अभिसरण:
निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका के बाहर वैश्विक आर्थिक वृद्धि तेज होगी, जिससे अमेरिका की विकास संबंधी बढ़त घटेगी।
मुख्य घटनाक्रम:
जर्मनी का राजकोषीय प्रोत्साहन
चीन की नीतिगत सहायता
यूरो ज़ोन में बेहतर विकास संभावनाएँ
जैसे-जैसे अन्य अर्थव्यवस्थाएँ मजबूत होंगी, पूंजी प्रवाह अमेरिकी डॉलर से हटकर विविधीकृत होने की संभावना है।
बाज़ार और निवेशकों पर प्रभाव:
(a) कमजोर डॉलर के सकारात्मक प्रभाव
अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कमाई बढ़ती है, क्योंकि विदेशी आय का डॉलर में मूल्य बढ़ जाता है।
उभरते और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार अधिक आकर्षक बनते हैं।
वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
(b) संभावित जोखिम
अमेरिकी आर्थिक वृद्धि में तेज़ गिरावट:
निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुँचा सकती है
बाज़ारों में व्यापक अस्थिरता ला सकती है
डॉलर की गिरावट को उम्मीद से अधिक तेज़ कर सकती है
फेड नीति में अंतर और मौद्रिक नीति का दृष्टिकोण:
फेड से और दर कटौती की उम्मीद है, जबकि:
अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक दरें स्थिर रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैं
यह नीतिगत अंतर (Policy Divergence) डॉलर को कमजोर करता है।
फेड के भीतर मतभेद और सतर्क मार्गदर्शन भविष्य की नीति को लेकर अनिश्चितता दर्शाते हैं।
आगे क्या? (2026 का दृष्टिकोण):
अधिकांश विदेशी मुद्रा (FX) रणनीतिकारों का मानना है:
डॉलर में धीमी लेकिन निरंतर कमजोरी आएगी, न कि पूर्ण पतन
अमेरिकी विकास आँकड़ों पर निर्भर अस्थिरता बनी रहेगी
कुछ निवेशकों का मानना है:
डॉलर की सबसे खराब गिरावट शायद खत्म हो चुकी है
लेकिन डॉलर में तेज़ मजबूती की गुंजाइश सीमित है
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्व:
डॉलर की चाल प्रभावित करती है:
वैश्विक व्यापार
पूंजी प्रवाह
उभरते बाज़ारों की स्थिरता
कमजोर डॉलर:
वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को आसान बना सकता है
डॉलर पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के ऋण बोझ को कम कर सकता है
निष्कर्ष:
हालाँकि अल्पकालिक स्थिरता कुछ राहत देती है, लेकिन संरचनात्मक कारक—फेड की ढील, वैश्विक वृद्धि का अभिसरण और डॉलर का अधिक मूल्यांकन—2026 में अमेरिकी डॉलर के लिए सीमित बढ़त का संकेत देते हैं। डॉलर की दिशा आगे भी मौद्रिक नीति के निर्णयों और वैश्विक आर्थिक रिकवरी की ताकत पर निर्भर करेगी।