PIB: प्रकाशित – 11 फरवरी 2026
यह चर्चा में क्यों है?
गृह मंत्रालय (MHA) ने संसद को ई-साक्ष्य (e-Sakshya) और न्याय सेतु (Nyaya Setu) ऐप्स के देशव्यापी क्रियान्वयन की जानकारी दी है। ये दोनों ऐप भारत के नए आपराधिक कानूनों — नवीन न्याय संहिताओं — के कार्यान्वयन से जुड़े प्रमुख डिजिटल उपकरण हैं। मंत्रालय का बयान इन ऐप्स के व्यापक उपयोग, संघीय जिम्मेदारियों और तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देने के केंद्र के प्रयासों को रेखांकित करता है, जो आपराधिक न्याय सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
भारत के आपराधिक न्याय तंत्र को आधुनिक और तकनीक-समर्थ बनाने की दिशा में हो रहे परिवर्तन पर फिर ध्यान गया, जब गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में ई-साक्ष्य ऐप और न्याय सेतु प्लेटफॉर्म की स्थिति पर अपडेट दिया। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लिखित उत्तर में दी। इससे स्पष्ट होता है कि नवीन न्याय संहिताओं के लागू होने के बाद पुलिसिंग में डिजिटल उपकरणों को किस तरह जोड़ा जा रहा है।

यह अपडेट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रगति के साथ-साथ संरचनात्मक सीमाओं को भी उजागर करता है। केंद्र ने डिजिटल ढांचा उपलब्ध कराया है, लेकिन संचालन और डेटा प्रबंधन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पास है — जो भारत की संघीय व्यवस्था को दर्शाता है।
संवैधानिक संदर्भ: पुलिस राज्य का विषय
सरकार के जवाब में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांत दोहराया गया — “पुलिस” और “लोक व्यवस्था” संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य विषय हैं। इसका मतलब है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध की जांच, अभियोजन और पुलिस का दैनिक संचालन राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस व्यवस्था के दो प्रमुख परिणाम हैं:
इस प्रकार केंद्र की भूमिका सहयोगात्मक है, निगरानी की नहीं। यह स्थिति राष्ट्रीय सुधारों और राज्य स्वायत्तता के बीच संतुलन को दर्शाती है।
ई-साक्ष्य ऐप क्या है?
ई-साक्ष्य ऐप गृह मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। यह विशेष रूप से जांच अधिकारियों के लिए बनाया गया है और साक्ष्यों की शृंखला को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। इसके प्रमुख फीचर:
यह ऐप जांच में पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास है। साक्ष्य संग्रह की डिजिटल प्रक्रिया अदालतों में मामलों को कमजोर करने वाली प्रक्रियागत त्रुटियों को कम करने में मदद कर सकती है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, ई-साक्ष्य ऐप का उपयोग वर्तमान में 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 15,899 पुलिस स्टेशनों में किया जा रहा है। यह देशव्यापी स्तर पर डिजिटल साक्ष्य ढांचे के संस्थागत होने का संकेत देता है, हालांकि विभिन्न राज्यों में इसकी प्रभावशीलता अलग-अलग हो सकती है।
डेटा गैप: केंद्र किन चीज़ों का रिकॉर्ड नहीं रखता
ऐप की व्यापक पहुँच के बावजूद, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह निम्नलिखित मामलों पर केंद्रीकृत डेटा नहीं रखता:
ऐसी जानकारी संबंधित राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों द्वारा रखी जाती है। यह खुलासा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डेटा विकेंद्रीकरण की चुनौती को उजागर करता है। बुनियादी ढांचा मौजूद होने के बावजूद, केंद्रीकृत विश्लेषण के अभाव में केंद्र सरकार के लिए निम्नलिखित पहलुओं का आकलन करना सीमित हो जाता है:
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन डैशबोर्ड के बिना यह आकलन करना कठिन हो जाता है कि तकनीक केवल स्थापित हुई है या वास्तव में पुलिसिंग व्यवस्था को बदल रही है।
न्याय सेतु: अंतर-एजेंसी समन्वय मंच
संसदीय जवाब में उल्लेखित दूसरा ऐप न्याय सेतु है, जिसे नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC), चंडीगढ़ ने चंडीगढ़ पुलिस के सहयोग से विकसित किया है। न्याय सेतु का उद्देश्य है:
ई-साक्ष्य ऐप जहाँ साक्ष्य संग्रह पर केंद्रित है, वहीं न्याय सेतु संस्थागत संपर्क को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पुलिस विभागों और न्याय प्रणाली से जुड़ी अन्य एजेंसियों के बीच संचार की खाई को पाटना है।

हालाँकि, गृह मंत्रालय ने कहा कि इसके क्रियान्वयन और प्रभावशीलता से जुड़े विस्तृत आँकड़े मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं हैं। इससे संकेत मिलता है कि न्याय सेतु अभी मुख्य रूप से एक क्षेत्रीय या विकेंद्रीकृत पहल है, न कि केंद्र द्वारा सीधे निगरानी किया जाने वाला कार्यक्रम।
नवीन न्याय संहिताओं से संबंध
दोनों ऐप भारत के नए आपराधिक कानूनों — नवीन न्याय संहिताओं — के कार्यान्वयन से जुड़े हैं, जिन्होंने औपनिवेशिक काल के कानूनों का स्थान लिया है। इन सुधारों का उद्देश्य है:
ये ऐप उन कानूनी परिवर्तनों को समर्थन देने वाला तकनीकी आधार हैं। सरकार डिजिटल दस्तावेज़ीकरण को नए कानूनी ढाँचे के तहत प्रक्रियागत शुचिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मानती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
संसद में दिया गया यह अपडेट कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
आगे की चुनौतियाँ
प्रगति के बावजूद कई संचालन संबंधी चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक अपनाने के साथ क्षमता निर्माण और नीतिगत समन्वय जरूरी है, वरना डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सीमित रह सकता है।
संभावित दीर्घकालिक प्रभाव
यदि इन ऐप्स का सफलतापूर्वक देशभर में क्रियान्वयन हुआ, तो वे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को बदल सकते हैं:
यह डिजिटल साक्ष्य प्रणाली भविष्य में AI-आधारित जांच, स्वचालित केस ट्रैकिंग और एकीकृत न्याय प्लेटफॉर्म का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है।
निष्कर्ष
संसद में गृह मंत्रालय का बयान महत्वाकांक्षा और सीमाओं — दोनों को दर्शाता है। केंद्र ने नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप डिजिटल उपकरण लॉन्च किए हैं, लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव राज्यों के स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
ई-साक्ष्य और न्याय सेतु ऐप भारत की उस दिशा को दिखाते हैं जहाँ तकनीक न्याय प्रणाली के केंद्र में होगी। हालांकि, केंद्रीकृत निगरानी की कमी एक ऐसी प्रशासनिक चुनौती है जिस पर भविष्य में नीतिगत ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।
भारत के डिजिटल शासन की ओर बढ़ते कदमों के बीच इन उपकरणों की सफलता का आकलन केवल इंस्टॉलेशन की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि वे कितनी तेज, निष्पक्ष और भरोसेमंद न्याय व्यवस्था प्रदान करते हैं।