केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन दिशा-निर्देश-2022

केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन दिशा-निर्देश-2022

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स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन दिशा-निर्देश-2022 जारी किये गए हैं।

मान्यता देने के लियेआवेदनों की जांच डीजी, पीआईबी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय प्रेस प्रत्यायन समिति द्वारा की जाती है।

इस समय देश में पीआईबी द्वारा मान्यता प्राप्त 2,457 पत्रकार हैं।

प्रमुख बिंदु 

दिशा-निर्देशों के तहत प्रावधान:

प्रत्यायन वापस लेने/निलंबित करने से संबंधित प्रावधान:

यदि कोई पत्रकार देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था के लिये गलत तरीके से कार्य करता है या उस पर गंभीर संज्ञेय अपराध का आरोप है।

यदि उसका कार्य शालीनता या नैतिकता के प्रतिकूल है या अदालत की अवमानना, मानहानि या किसी अपराध हेतु उकसाने से संबंधित है।

मान्यता प्राप्त मीडियाकर्मियों को सार्वजनिक/सोशल मीडिया प्रोफाइल, विजिटिंग कार्ड्स, लेटर हेड्स या किसी अन्य फॉर्म या किसी भी प्रकाशित सामग्री पर "भारत सरकार से मान्यता प्राप्त" शब्द का उपयोग करने से प्रतिबंधित करना।

प्रत्यायन प्रदान करने से संबंधित प्रावधान:

प्रत्यायन केवल दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के पत्रकारों के लिये ही उपलब्ध है जिसकी कई श्रेणियांँ हैं।

एक पत्रकार को पूर्णकालिक पत्रकार या समाचार संगठन में एक कैमरापर्सन के रूप में न्यूनतम पाँच वर्ष का पेशेवर अनुभव होना चाहिये या पात्र बनने के लिये फ्रीलांसर के रूप में न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव होना चाहिये।

30 से अधिक वर्षों के अनुभव वाले और 65 वर्ष से अधिक आयु के वयोवृद्ध पत्रकार भी पात्र हैं।

एक समाचार पत्र या पत्रिका के लिये न्यूनतम दैनिक संचलन 10,000 होना चाहिये और समाचार एजेंसियों के पास कम-से-कम 100 ग्राहक होने चाहिये। विदेशी समाचार संगठनों और विदेशी पत्रकारों पर भी इसी तरह के नियम लागू होते हैं।

डिजिटल समाचार प्लेटफाॅर्मों के साथ काम करने वाले पत्रकार भी पात्र हैं, बशर्ते वेबसाइट पर प्रतिमाह न्यूनतम 10 लाख विशिष्ट विज़िटर होने चाहिये।

विदेशी समाचार मीडिया संगठनों के लिये काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को कोई मान्यता नहीं दी जाएगी।

केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन समिति (CMAC):

सरकार ‘केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन समिति’ नामक एक समिति का गठन करेगी।

इस समिति की अध्यक्षता प्रधान महानिदेशक, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा की जाएगी और इसका समिति का गठन दिशा-निर्देशों के तहत निर्धारित कार्यों के निर्वहन हेतु सरकार द्वारा नामित 25 सदस्यों को शामिल कर किया जाएगा।

‘केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन समिति’ अपनी पहली बैठक की तारीख से दो वर्ष की अवधि के लिये कार्य करेगी और यदि आवश्यक हो तो तिमाही में एक बार या अधिक बार बैठक करेगी।

संबंधित चिंताएँ:

एक पत्रकार के प्रत्यायन को निलंबित या वापस लिया जाना चाहिये या नहीं, यह तय करते समय भारत की संप्रभुता या अखंडता के लिये क्या यह प्रतिकूल है, इसका आकलन करने हेतु दिशा-निर्देश सरकार द्वारा नामित अधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिये गए हैं।

पत्रकार की मुख्य ज़िम्मेदारियों में से एक गलत कार्य को उज़ागर करना है, चाहे वह सार्वजनिक अधिकारियों, राजनेताओं, बड़े व्यापारियों, कॉर्पोरेट समूहों या सत्ता में बैठे अधिकारियों द्वारा क्यों न किया गया हो।

इसका परिणाम कई बार ऐसी शक्तियों द्वारा पत्रकारों को डराना या सूचना को बाहर आने से रोकना हो सकता है।

पत्रकार अक्सर उन मुद्दों और नीतिगत फैसलों पर रिपोर्टिंग करते हैं जो सरकार के विरुद्ध होते हैं।

संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी प्रकार के मामले को इनमें से किसी भी प्रावधान का उल्लंघन माना जा सकता है।

प्रत्यायन कैसे मदद करता है?

 महत्त्वपूर्ण परिसर से रिपोर्ट करने की अनुमति:

कुछ आयोजनों में जहाँ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति मौज़ूद होते हैं, वहाँ केवल मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही परिसर से रिपोर्ट करने की अनुमति होती है।

पहचान की रक्षा में मदद:

दूसरा, प्रत्यायन यह सुनिश्चित करती है कि एक पत्रकार अपने स्रोतों की पहचान की रक्षा करने में सक्षम है।

एक प्रत्यायन प्राप्त पत्रकार को यह खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है कि वह केंद्रीय मंत्रालयों के कार्यालयों में प्रवेश करते समय किससे मिलना चाहता है, क्योंकि प्रत्यायन कार्ड गृह मंत्रालय के सुरक्षा क्षेत्र के तहत भवनों में प्रवेश के लिये मान्य होता है।

पत्रकार को लाभ:

प्रत्यायन से पत्रकार और उसके परिवार को कुछ लाभ मिलते हैं, जैसे- केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना में शामिल होना और रेलवे टिकट पर कुछ रियायतें मिलना।

प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

संविधान, अनुच्छेद 19 के तहत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जो वाक् स्वतंत्रता इत्यादि के संबंध में कुछ अधिकारों के संरक्षण से संबंधित है।

प्रेस की स्वतंत्रता को भारतीय कानूनी प्रणाली द्वारा स्पष्ट रूप से संरक्षित नहीं किया गया है, लेकिन यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के तहत संरक्षित है, जिसमें कहा गया है- "सभी नागरिकों को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार होगा"।

हालाँकि प्रेस की स्वतंत्रता भी असीमित नहीं होती है। कानून इस अधिकार के प्रयोग पर प्रतिबंधों को लागू कर सकता है, जो अनुच्छेद 19 (2) के तहत इस प्रकार हैं-

भारत की संप्रभुता और अखंडता के हितों से संबंधित मामले, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता या न्यायालय की अवमानना के संबंध में मानहानि या अपराध को प्रोत्साहन।

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