सीबीएसई ने कक्षा III से VIII तक के लिए एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का पाठ्यक्रम शुरू किया

सीबीएसई ने कक्षा III से VIII तक के लिए एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का पाठ्यक्रम शुरू किया

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Source: PIB| Date: April 1, 2026   

 

 

समाचार का सारांश एवं संदर्भ

1 अप्रैल 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कक्षा III से VIII के विद्यार्थियों के लिए सीबीएसई का कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पाठ्यक्रम लॉन्च किया। यह पहल स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में लागू की जा रही है और यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद विद्यालयी स्तर पर प्रौद्योगिकी शिक्षा में भारत के सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक हस्तक्षेपों में से एक है।

यह पाठ्यक्रम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों; जिनमें केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय शामिल हैं; में लागू किया जाएगा। ये संस्थाएं देश भर के लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करती हैं। यह लॉन्च एक स्पष्ट नीतिगत निर्णय का प्रतीक है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी साक्षरता को उच्च शिक्षा में नहीं बल्कि प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय स्तर पर ही समाहित किया जाए।

 

नीतिगत महत्व एवं राजनीतिक संदेश

इस लॉन्च में एक सुस्पष्ट राजनीतिक और वैचारिक संदेश निहित है। मंत्री प्रधान ने इस पहल को 'शिक्षा के लिए AI, शिक्षा में AI' की दोहरी दृष्टि के अंतर्गत प्रस्तुत किया — एक ऐसी अवधारणा जो AI को एक शैक्षणिक साधन और अध्ययन के विषय दोनों के रूप में स्थापित करती है।

राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने एक दार्शनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि चुनौती केवल बच्चों को बदलती दुनिया के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि 'ऐसी दुनिया के लिए तैयार करना है जो उन तरीकों से बदलेगी जिनकी हम अभी कल्पना भी नहीं कर सकते।' इस दृष्टिकोण में पाठ्यक्रम को एक स्थिर पाठ्यपुस्तक संशोधन के रूप में नहीं, बल्कि अनुकूलनीय संज्ञानात्मक क्षमताओं — 'निरंतर सीखने, अनसीखा करने और पुनः सीखने की क्षमता' — के विकास के प्रयास के रूप में देखा गया है।

 

नीतिगत महत्व के कई आयाम स्पष्ट हैं:

  • NEP 2020 की पूर्ति: यह पाठ्यक्रम AI और मशीन लर्निंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत को वैश्विक नेता बनाने के NEP 2020 के लक्ष्य को साकार करता है।
  • NCF-SE 2023 के साथ संरेखण: अधिगम लक्ष्य, दक्षताएं और परिणाम, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 से व्युत्पन्न हैं।
  • चरणबद्ध शैक्षणिक संरचना: पहले कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को संज्ञानात्मक आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, उसके बाद उच्च कक्षाओं में AI अवधारणाएं जोड़ी जाएंगी।
  • संस्थागत एकता: लॉन्च में CBSE, NCERT, KV और NV के नेतृत्व की उपस्थिति पूरी व्यवस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

पाठ्यक्रम संरचना: प्रमुख विशेषताएं

पाठ्यक्रम का डिजाइन यह दर्शाता है कि बुनियादी संज्ञानात्मक कौशल और प्रौद्योगिकी शिक्षा के बीच की परस्पर क्रिया को गहराई से समझा गया है।

 

कम्प्यूटेशनल थिंकिंगबौद्धिक नींव के रूप में

AI अनुप्रयोगों पर सीधे जाने के बजाय, पाठ्यक्रम कम्प्यूटेशनल थिंकिंग से शुरू होता है — विघटन, पैटर्न पहचान, अमूर्तता और एल्गोरिथम डिजाइन का वह संज्ञानात्मक ढांचा जो AI की आधारशिला है। यह शैक्षणिक दृष्टि से सुदृढ़ है। जो विद्यार्थी कम्प्यूटेशनल थिंकिंग समझेंगे, वे AI की अवधारणाओं को कहीं बेहतर ढंग से आत्मसात कर सकेंगे।

 

गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षाशास्त्र

गणित के खेल, पहेलियाँ, हाथों-हाथ वर्कशीट और दृश्य समस्या-समाधान पर आधारित शिक्षण दृष्टिकोण, 8 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों की सीखने की विधि पर शोध से मेल खाता है। ऐसे विषय के लिए जो स्वाभाविक रूप से रचनात्मक और पुनरावृत्त चिंतन की मांग करता है, रटने की पद्धति से बचना एक सचेत और उचित विकल्प है।

 

अंतः विषयक एकीकरण

पाठ्यक्रम कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को गणित, विज्ञान और मानविकी से स्पष्ट रूप से जोड़ता है। यह अंतःविषयक दृष्टिकोण विद्यार्थियों को AI को एक अलग-थलग तकनीकी विषय के रूप में देखने से रोकता है और इसे सभी ज्ञान क्षेत्रों में लागू होने वाली सोचने की एक विधि के रूप में स्थापित करता है।

 

दक्षता-आधारित मूल्यांकन

रटने की पद्धति से हटकर CT पहेलियों, समूह गतिविधियों और शिक्षक अवलोकन डायरी का उपयोग एक प्रगतिशील मूल्यांकन डिजाइन है। यह पद्धति ज्ञान के स्मरण की बजाय उसके अनुप्रयोग का मूल्यांकन करती है।

 

आलोचनात्मक विश्लेषण: चुनौतियां एवं कमियां

इस पहल की खूबियों के बावजूद कुछ कार्यान्वयन चुनौतियां और संरचनात्मक कमियां गंभीर विचार की मांग करती हैं:

 

शिक्षक तैयारी

इस पाठ्यक्रम की सफलता लगभग पूरी तरह शिक्षकों की गुणवत्ता पर निर्भर है। भारत का प्राथमिक और मध्य विद्यालयी शिक्षक वर्ग विशाल, भौगोलिक रूप से बिखरा हुआ और असमान रूप से प्रशिक्षित है। सरकारी संचार में 'व्यापक शिक्षक हैंडबुक' का उल्लेख है, किंतु अर्ध-शहरी और ग्रामीण CBSE विद्यालयों में आवश्यक बड़े पैमाने पर शिक्षक उन्नयन की रूपरेखा अस्पष्ट बनी हुई है।

 

बुनियादी ढांचे की असमानता

कम्प्यूटेशनल थिंकिंग बिना कंप्यूटर के भी सिखाई जा सकती है, लेकिन सार्थक AI शिक्षा अंततः डिजिटल बुनियादी ढांचे की मांग करती है। कई CBSE से संबद्ध विद्यालयों — विशेषकर टियर 2 और टियर 3 शहरों में सरकारी विद्यालयों — में इंटरनेट, उपकरणों और बिजली की अनिश्चितता एक दोहरे कार्यान्वयन का खतरा पैदा करती है: संसाधन-सम्पन्न शहरी विद्यालय जहां पाठ्यक्रम फले-फूलेगा, और कम-संसाधन वाले विद्यालय जहां यह केवल आकांक्षा बनकर रह जाएगा।

 

पाठ्यक्रम भार एवं एकीकरण

कक्षा III-VIII में एक नए विषय क्षेत्र को जोड़ने से पाठ्यक्रम अधिभार की वैध चिंताएं उठती हैं। जब तक CT और AI को मौजूदा विषयों (गणित, विज्ञान, EVS) में सार्थक रूप से एकीकृत नहीं किया जाता, शिक्षक और विद्यार्थी इसे अतिरिक्त बोझ के रूप में अनुभव कर सकते हैं।

 

नैतिक AI शिक्षा

पाठ्यक्रम में 'प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग' और 'नैतिक निर्णय-निर्माण' का उल्लेख है, लेकिन ये संक्षिप्त रूप में सूचीबद्ध हैं। एल्गोरिथमिक पूर्वाग्रह, डेटा गोपनीयता, गलत सूचना और AI-निर्मित सामग्री को लेकर वैश्विक चिंताओं को देखते हुए, AI नैतिकता का अधिक ठोस और व्यापक समावेश आवश्यक है।

 

मूल्यांकन क्षमता

दक्षता-आधारित मूल्यांकन सिद्धांत में वांछनीय है, लेकिन इसके लिए प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं की आवश्यकता है जो रचनात्मक चिंतन जैसे गुणात्मक संकेतकों का विश्वसनीय मूल्यांकन कर सकें। शिक्षक अवलोकन डायरी उतनी ही उपयोगी है जितने कि उन्हें उपयोग करने वाले शिक्षक सक्षम हैं।

 

तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य

भारत अकेला नहीं है। कई देशों ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI साक्षरता को विद्यालयी पाठ्यक्रम में एकीकृत किया है:

  • चीन: 2019 से प्राथमिक विद्यालयों में AI शिक्षा अनिवार्य है — समर्पित पाठ्यपुस्तकों और राष्ट्रीय मानकों के साथ। भारत की पहल समान संरचनात्मक तर्क का अनुसरण करती है, लेकिन देर से आई है।
  • फिनलैंड: CT को एक अलग मॉड्यूल के रूप में नहीं, बल्कि सभी विषयों में एकीकृत करता है — एक अधिक गहराई से समाहित मॉडल जिससे भारत दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीख सकता है।
  • यूनाइटेड किंगडम: 2014 से Key Stage 1 (5 वर्ष की आयु) से कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम लागू है। भारत का कक्षा III से शुरुआत का बिंदु व्यापक रूप से तुलनीय है।
  • सिंगापुर: मजबूत शिक्षक समर्थन ढांचे के साथ 'Computational Thinking for Coding' का उपयोग करता है — एक ऐसा मॉडल जिसका अध्ययन भारत को बड़े पैमाने की सार्वजनिक विद्यालय प्रणाली की साझा चुनौती को देखते हुए अवश्य करना चाहिए।

भारत का लाभ है उसका विशाल पैमाना। यदि CBSE-व्यापी रोलआउट सुचारू रूप से क्रियान्वित हो, तो यह दुनिया में विद्यालयी स्तर पर AI शिक्षा के सबसे बड़े परिनियोजनों में से एक होगा। चुनौती नीतिगत महत्वाकांक्षा को एक अत्यंत विविध प्रणाली में सुसंगत कक्षा वास्तविकता में बदलना है।

 

रणनीतिक निहितार्थ

CBSE CT & AI पाठ्यक्रम के निहितार्थ कक्षा से परे भी फैले हैं:

  • कार्यबल पाइपलाइन: कक्षा III से AI साक्षरता को समाहित करने से लगभग 10-14 वर्षों में ऐसा कार्यबल तैयार होना शुरू होगा जो पिछली पीढ़ियों की तुलना में मूलभूत रूप से अधिक AI-सक्षम होगा।
  • समता और पहुंच: यदि न्यायसंगत तरीके से लागू किया जाए, तो यह पाठ्यक्रम AI प्रवाह का लोकतंत्रीकरण कर सकता है — अभिजात्य प्रौद्योगिकी शिक्षा और व्यापक सार्वजनिक शिक्षा के बीच की खाई को कम कर सकता है।
  • राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी: जो पीढ़ी बचपन से कम्प्यूटेशनल थिंकिंग में प्रशिक्षित होगी, वह तकनीकी उद्यमियों, शोधकर्ताओं और समस्या-समाधाकों की अधिक संभावना रखती है।
  • वैश्विक नेतृत्व एवं सॉफ्ट पावर: इसे भारत की 'प्रौद्योगिकी-संचालित कंप्यूटिंग' वैश्विक नेतृत्व की कथा के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना, एक व्यापक भू-राजनीतिक और आर्थिक ब्रांड-निर्माण अभ्यास का हिस्सा है।

 

निष्कर्ष एवं सिफारिशें

CBSE CT & AI पाठ्यक्रम का लॉन्च एक वास्तविक रूप से महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। आशय सुदृढ़ है, शैक्षणिक डिजाइन काफी हद तक सुविचारित है और NEP 2020 तथा NCF-SE 2023 के साथ संरेखण एक मजबूत संरचनात्मक आधार प्रदान करता है। हालांकि, आशय और डिजाइन सफलता के लिए आवश्यक लेकिन पर्याप्त शर्तें नहीं हैं। क्रियान्वयन ही सब कुछ होगा।

प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित सिफारिशें प्रस्तुत हैं:

  • तत्काल एवं बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण: 2026-27 सत्र शुरू होने से पहले CT & AI साक्षरता में राष्ट्रीय शिक्षक प्रमाणन कार्यक्रम शुरू करें। वितरण के लिए IIT, IIM और स्थापित EdTech भागीदारों के साथ सहयोग करें।
  • बुनियादी ढांचे का ऑडिट: कनेक्टिविटी और उपकरण अंतराल का मानचित्रण करने के लिए कार्यान्वयन पूर्व CBSE-संबद्ध विद्यालयों का ऑडिट करें। कम-संसाधन वाले विद्यालयों के लिए ऑफलाइन-सक्षम शिक्षण सामग्री विकसित करें।
  • ठोस नैतिकता मॉड्यूल: एक आयु-उपयुक्त AI नैतिकता घटक विकसित करें — जिसमें पूर्वाग्रह, गोपनीयता और जिम्मेदार प्रौद्योगिकी उपयोग शामिल हों — जो पाठ्यक्रम में एक उपसंग्रह के रूप में नहीं, बल्कि समग्र रूप से समाहित हो।
  • अंतःविषयक एकीकरण रूपरेखा: विद्यालयों को स्पष्ट मार्गदर्शन जारी करें कि CT & AI दक्षताओं को मौजूदा विषय क्षेत्रों में कैसे समाहित किया जाए।
  • कठोर निगरानी एवं मूल्यांकन: 2026-27 में आधारभूत मूल्यांकन और दीर्घकालिक मूल्यांकन ढांचा स्थापित करें।
  • पायलट-फीडबैक: पहले वर्ष को एक संरचित पायलट के रूप में उपयोग करें, जिसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से औपचारिक फीडबैक तंत्र हो।

 

समापन विचार

भारत ने विद्यालयी शिक्षा के आधारभूत वर्षों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समाहित करके एक साहसिक और आवश्यक कदम उठाया है। CBSE CT & AI पाठ्यक्रम, यदि उस कठोरता, समता और शिक्षक निवेश के साथ लागू किया जाए जिसकी वह मांग करता है, तो भारत की मानव पूंजी की दिशा को मौलिक रूप से पुनर्आकार देने की क्षमता रखता है। नीतिगत संकेत मजबूत है। क्रियान्वयन की अनिवार्यता और भी मजबूत है। आने वाला शैक्षणिक वर्ष इस बात की पहली और महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि यह परिवर्तनकारी महत्वाकांक्षा परिवर्तनकारी कक्षा वास्तविकता में तब्दील होती है या नहीं।

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