स्रोत: द हिंदू
क्या खबर है?
उत्तराखण्ड सरकार बद्री गाय की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिंग-वर्गीकृत वीर्य और भ्रूण स्थानांतरण प्रौद्योगिकी के माध्यम से उसकी आनुवंशिक वृद्धि की योजना बना रही है।
सरकार द्वारा किए गए उपाय
लागू किए जाने वाले नए तरीके:
मल्टीपल ओव्यूलेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर (एमओईटी): एक पारंपरिक भ्रूण फ्लश जो उन्नत पशु प्रजनन में उपयोग की जाने वाली सबसे आम प्रक्रिया है।
ओवम पिकअप इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ): इसका उपयोग प्रति पशु उपज बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज (एआरटी) का परिचय।
बद्री गाय क्या है?
बद्री नस्ल का नाम बद्रीनाथ में चार धाम के पवित्र मंदिर से लिया गया है।
यह केवल उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पाई जाती है और पहले इसे 'पहाड़ी' गाय के रूप में जाना जाता था।
विशेषताएं: मवेशियों की नस्ल लंबी टांगों और शरीर के विभिन्न रंगों- काले, भूरे, लाल, सफेद या भूरे रंग के साथ आकार में छोटी होती है।
अद्वितीय गुण:
नस्ल से जुड़ा मामला
इसकी दुग्ध उत्पादन क्षमता काफी कम है क्योंकि यह प्रतिदिन एक से तीन लीटर दूध देती है।
महत्व: उत्तराखंड के इस मवेशी ने राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो द्वारा बद्री नस्ल के रूप में शामिल किए जाने के बाद उत्तराखंड की पहली प्रमाणित मवेशी नस्ल होने का प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया है।
भारत की कुछ देशी गायों की नस्लें
अलमबदी, अमृतमहल, गिर, लाल सिंधी, साहीवाल, बारगुर, हल्लीकर, कंगायम, पुलिकुलम
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