क्या मणिपुर के उग्रवादी स्टारलिंक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं?

क्या मणिपुर के उग्रवादी स्टारलिंक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं?

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द हिंदू: 23 दिसंबर 2024 को प्रकाशित:

 

समाचार में क्यों?

भारतीय सेना और पुलिस ने मणिपुर में एक छापेमारी के दौरान हथियारों के साथ एक संदिग्ध स्टारलिंक सैटेलाइट एंटीना और राउटर जब्त किया। इससे यह चिंता उत्पन्न हुई कि मणिपुर में उग्रवादी स्टारलिंक तकनीक का दुरुपयोग कर सकते हैं, जबकि भारत में स्टारलिंक सेवाओं की अनुमति नहीं है।

 

मणिपुर के उग्रवादी:

जब्त किए गए स्टारलिंक उपकरण पर प्रतिबंधित मणिपुरी उग्रवादी समूह RPF/PLA से संबंधित निशान पाए गए, जो म्यांमार से संचालित होता है। उग्रवादियों द्वारा संचार और संचालन के लिए स्टारलिंक इंटरनेट का उपयोग किए जाने की संभावना क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता है।

 

स्टारलिंक क्या है?:

स्टारलिंक, एलन मस्क की स्पेसएक्स परियोजना है, जो सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा प्रदान करती है। यह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट के नेटवर्क के माध्यम से हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करती है। यह सेवा विशेष रूप से दूरस्थ और कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों के लिए बनाई गई है और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध है।

 

विवाद क्या है?:

दुरुपयोग का शक: छापेमारी में मिले स्टारलिंक डिवाइस पर उग्रवादियों द्वारा इसका उपयोग किए जाने का आरोप है।

अवैध बिक्री: भारत में अनुमति न होने के बावजूद, स्टारलिंक उपकरण भारतमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे हैं और अन्य अवैध गतिविधियों, जैसे तस्करी में उपयोग हो रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय निगरानी: स्टारलिंक का दावा है कि भारत जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में इसके सिग्नल बंद हैं, लेकिन सैटेलाइट कवरेज को नियंत्रित करने में चुनौतियां और सिस्टम की खामियां इसे अप्राधिकृत उपयोग के लिए खुला छोड़ देती हैं।

 

क्या स्टारलिंक इंटरनेट को नियंत्रित किया जा सकता है?:

स्टारलिंक के सैटेलाइट डेटा को एन्क्रिप्ट करते हैं ताकि इसे हैक या अप्राधिकृत उपयोग से बचाया जा सके। हालांकि, भौगोलिक प्रतिबंध लागू करने में कई चुनौतियां हैं:

अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर सिग्नल को सटीक रूप से रोकना मुश्किल है।

विवादित या अस्पष्ट सीमाओं के कारण सैटेलाइट सिग्नल का नियंत्रण कठिन है।

प्रतिबंधित क्षेत्रों में बाहर से खरीदे गए डिवाइस भौगोलिक सीमाओं के बावजूद काम कर सकते हैं।

डिवाइस की अद्वितीय पहचान संख्या के माध्यम से मालिक का पता लगाना संभव है, लेकिन अवैध खरीद को छुपाने वाले शैडो कंपनियां इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।

 

भारतीय कानून क्या कहता है?:

भारत में उपग्रह आधारित संचार उपकरणों के उपयोग पर भारतीय वायरलेस अधिनियम और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत सख्त प्रतिबंध हैं। उपग्रह फोन या ऐसे अन्य उपकरणों का अनधिकृत उपयोग अवैध है और दंडनीय है। ये कानून आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए बनाए गए हैं।

 

निष्कर्ष:

मणिपुर में स्टारलिंक उपकरण की जब्ती यह सवाल खड़ा करती है कि इस तकनीक का संघर्ष क्षेत्रों में दुरुपयोग कैसे रोका जाए। जबकि स्टारलिंक दुनिया भर में इंटरनेट पहुंच में क्रांति ला रहा है, अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए सख्त उपाय आवश्यक हैं। भारत को स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए और प्रवर्तन व तकनीकी नियंत्रण में खामियों को दूर करना चाहिए। 

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