मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए 5000 जवान भेजे गए:

मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए 5000 जवान भेजे गए:

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द हिंदू: 19 नवंबर 2024 को प्रकाशित:

 

समाचार में क्यों:

मणिपुर में जिरीबाम जिले में हिंसा बढ़ने के कारण केंद्र सरकार ने 5,000 अतिरिक्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) की तैनाती की है। इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम और बिष्णुपुर जिलों में कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के अलावा पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए। कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले को लेकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

जातीय तनाव: मणिपुर में मैतेई (बहुसंख्यक) और कुकी-जो (जनजातीय अल्पसंख्यक) समुदायों के बीच दशकों से जातीय संघर्ष चल रहा है। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग हालिया विवाद का मुख्य कारण है।

मई 2023 से हिंसा: मई में हिंसा भड़कने के बाद अब तक 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और कई मौतें हो चुकी हैं। महिलाओं और बच्चों पर हुए हमलों ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

 

इस निर्णय का महत्व:

सुरक्षा मजबूत करना: यह निर्णय सरकार की स्थिति की गंभीरता को समझने और इसे स्थिर करने की मंशा को दर्शाता है।

प्रशासनिक नियंत्रण: कानून व्यवस्था बहाल करने से मानवीय संकट को हल करने और विस्थापितों की मदद करने में मदद मिलेगी।

निवारक उपाय: कर्फ्यू और इंटरनेट प्रतिबंध फैलती अफवाहों और हिंसा को रोकने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।

 

निर्णय का प्रभाव:

तत्काल प्रभाव:

  • सुरक्षा की उपस्थिति तत्काल हिंसा को कम कर सकती है और जनता का भरोसा बहाल कर सकती है।
  • केंद्र सरकार की सक्रियता आलोचनाओं को कम कर सकती है।

दीर्घकालिक प्रभाव:

  • जातीय समुदायों के बीच संवाद और पुनर्वास कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
  • अगर बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो हिंसा लंबे समय तक बनी रह सकती है।
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