₹45,000 करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना शुरू:

₹45,000 करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना शुरू:

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द हिंदू: 26 दिसंबर 2024 को प्रकाशित:

 

चर्चा में क्यों है:

₹45,000 करोड़ का केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्य प्रदेश के खजुराहो में किया गया।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करने का लक्ष्य रखती है।

इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की जल प्रबंधन दृष्टि को उजागर करते हुए उनके योगदान को श्रेय देने की बात की गई, जिससे ऐतिहासिक विवाद को भी रेखांकित किया गया।

 

केन-बेतवा लिंक परियोजना:

उद्देश्य: बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल, सिंचाई और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना।

परियोजना का दायरा:

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में केन और बेतवा नदियों को जोड़ना।

सिंचाई क्षमता: 11 लाख हेक्टेयर भूमि।

10 जिलों में घरेलू जल आपूर्ति।

ऊर्जा उत्पादन: 100 मेगावाट से अधिक जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा।

प्रमुख विकास:

दाऊधन बांध सिंचाई परियोजना की आधारशिला रखी गई।

मध्य प्रदेश पहला राज्य बना जहां एक साथ दो नदी-जोड़ परियोजनाएं (केन-बेतवा और पार्वती-कालिसिंध-चंबल) चल रही हैं।

 

इतिहास:

डॉ. अंबेडकर की दृष्टि:

बड़े नदी घाटी परियोजनाओं और केंद्रीय जल आयोग की स्थापना का श्रेय अंबेडकर को दिया गया।

PM मोदी ने अंबेडकर के योगदान को पूर्ववर्ती सरकारों, विशेषकर कांग्रेस द्वारा अनदेखा करने पर जोर दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी की पहल:

वाजपेयी के कार्यकाल में नदी-जोड़ो की अवधारणा शुरू की गई।

नदियों को जोड़ने (ILR) की अवधारणा 1982 में शुरू की गई थी; इसे 1999-2004 के दौरान प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान सक्रिय रूप से अपनाया गया था।

केन-बेतवा परियोजना पर समृद्धि:

आर्थिक प्रभाव:

सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर दशकों पुरानी समस्या का समाधान।

10 जिलों में कृषि उत्पादन और आजीविका में सुधार।

नवीकरणीय ऊर्जा:

जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाओं से सतत विकास को बढ़ावा।

क्षेत्रीय विकास:

नदी जल उपयोग को लेकर राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने में मदद।

पूरक पहल:

मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में पहला फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा परियोजना का शुभारंभ।

अटल ग्राम सेवा सदनों की नींव रखी गई, जिससे जमीनी स्तर पर शासन में सुधार होगा।

 

निष्कर्ष:

केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की समस्याओं को हल करने और क्षेत्र में कृषि और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नदी-जोड़ परियोजनाओं का पुनरुद्धार जल संसाधन प्रबंधन को सतत बनाने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

जल संरक्षण में डॉ. अंबेडकर के योगदान की स्वीकृति भारत की विकास दृष्टि के ऐतिहासिक संदर्भ को उजागर करती है।

पन्ना टाइगर रिजर्व पर संभावित प्रभाव जैसे पारिस्थितिक चिंताओं का समाधान करना आवश्यक है ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।

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