27वीं संस्करण सचिवालय सुधार मासिक रिपोर्ट : शासन दक्षता, स्वच्छता एवं डिजिटल परिवर्तन पर प्रकाश

27वीं संस्करण सचिवालय सुधार मासिक रिपोर्ट : शासन दक्षता, स्वच्छता एवं डिजिटल परिवर्तन पर प्रकाश

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पीआईबी : प्रकाशित 23 फरवरी 2026

 

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने जनवरी 2026 के लिए अपनी सचिवालय सुधार मासिक रिपोर्ट का 27वाँ संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में शासन, प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं में सुधार के लिए किए गए प्रमुख प्रयासों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करती है।

स्वच्छता अभियान, -ऑफिस के कार्यान्वयन, वेस्ट-टू-वेल्थ (अपशिष्ट से संपदा) पहल तथा बेहतर निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं जैसे कदमों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए यह रिपोर्ट सरकार के नौकरशाही तंत्र के आधुनिकीकरण और सतत, प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है।

 

स्वच्छता एवं लंबित मामलों में कमी : कार्यालयीन कार्यस्थलों का रूपांतरण

जनवरी 2026 की रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताओं में से एक स्वच्छता एवं लंबित मामलों में कमी (Pendency Reduction) पहलों की निरंतरता और प्रभाव है। इन कार्यक्रमों को केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में लागू किया गया है, ताकि कार्यालयीन स्थान को मुक्त किया जा सके, पुराने अभिलेखों का निस्तारण किया जा सके और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाया जा सके।

जनवरी 2026 में देशभर के 5,188 कार्यालयों में सफलतापूर्वक स्वच्छता अभियान चलाए गए, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 4.34 लाख वर्ग फुट कार्यालयीन स्थान मुक्त किया गया। इस अभियान में कोयला मंत्रालय ने 1,88,687 वर्ग फुट स्थान मुक्त कर सबसे अधिक योगदान दिया, जबकि भारी उद्योग मंत्रालय ने 62,129 वर्ग फुट स्थान खाली कराया। इन अभियानों ने न केवल भौतिक अव्यवस्था को समाप्त किया, बल्कि कार्य वातावरण को भी बेहतर बनाया, जिससे कार्यालय अधिक कार्यक्षम और नागरिक-अनुकूल बने।

अभिलेख प्रबंधन इस पहल का एक महत्वपूर्ण घटक रहा है। अभियान के तहत लगभग 1,82,000 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से 81,322 फाइलों को निरस्त (Weeded Out) किया गया। इस प्रयास ने प्रशासनिक कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित किया, अनावश्यक पुनरावृत्ति को कम किया और यह सुनिश्चित किया कि निर्णय-निर्माण प्रक्रिया पुराने या अनावश्यक दस्तावेजों के कारण होने वाली देरी के बिना कुशलतापूर्वक संचालित हो सके।

माह के दौरान कुल 5,57,852 लोक शिकायतों का निस्तारण किया गया, जो प्राप्त कुल शिकायतों का 90.41% है। इसके अतिरिक्त 1,032 सांसद संदर्भों तथा 375 राज्य सरकार संदर्भों का भी निपटारा किया गया। यह उपलब्धि उत्तरदायी शासन की दिशा में एक केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है और नागरिकों की चिंताओं का समयबद्ध समाधान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।

 

कबाड़ निस्तारण से राजस्व : वेस्ट-टू-वेल्थ पहल

रिपोर्ट में कार्यालयों के अपशिष्ट के सतत एवं आर्थिक रूप से उत्पादक प्रबंधन को दर्शाते हुए कबाड़ निस्तारण के माध्यम से राजस्व सृजन के सरकार के प्रयासों पर भी विशेष बल दिया गया है।

स्वच्छता अभियान के अंतर्गत वर्ष 2021 से अब तक सरकार ने कबाड़ की बिक्री से कुल ₹4,405.28 करोड़ का संचयी राजस्व अर्जित किया है। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान कबाड़ निस्तारण के माध्यम से ₹200.21 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

रेल मंत्रालय, कोयला मंत्रालय तथा भारी उद्योग मंत्रालय जैसे मंत्रालयों ने इन आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो इस अभियान में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। इन पहलों के माध्यम से प्राप्त राजस्व न केवल आर्थिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को भी बढ़ावा देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कबाड़ सामग्री को व्यर्थ फेंकने के बजाय पुनर्चक्रित (रीसायकल) या पुनः उपयोग (रीयूज़) किया जाए।

राजस्व सृजन के अतिरिक्त, कई मंत्रालयों ने “वेस्ट टू वेल्थ” (अपशिष्ट से संपदा) की अभिनव पहलें भी अपनाई हैं। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु स्थित नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ में पैकिंग सामग्री के अपशिष्ट को बेंच में परिवर्तित किया गया, जबकि रेल मंत्रालय ने रचनात्मक “वेस्ट टू आर्ट” स्थापनाएँ आयोजित कीं। ये पहलें न केवल कार्यालयों की सौंदर्यात्मकता और उपयोगिता को बढ़ाती हैं, बल्कि सरकारी कार्यालयों में सतत संसाधन उपयोग का एक आदर्श भी प्रस्तुत करती हैं।

 

निर्णय-निर्माण में दक्षता में वृद्धि

रिपोर्ट में मंत्रालयों और विभागों में निर्णय-निर्माण की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार पर भी प्रकाश डाला गया है। इस दिशा में लागू किए गए प्रमुख उपायों में से एक “डीलियरिंग” (Delayering) है, जिसका उद्देश्य अंतिम निर्णय से पूर्व फाइलों के विभिन्न स्तरों से गुजरने की संख्या को कम कर लालफीताशाही (ब्यूरोक्रेटिक रेड टेप) को घटाना है।

सक्रिय फाइलों के लिए औसत विशिष्ट लेन-देन स्तर (Distinct Transaction Levels) वर्ष 2021 में 7.19 से घटकर जनवरी 2026 तक 4.31 हो गए हैं। यह तेज निर्णय-निर्माण प्रक्रिया और प्रक्रियात्मक विलंब में कमी को दर्शाता है।

लोक शिकायतों के निस्तारण, लंबित मामलों में कमी तथा अभिलेख प्रबंधन में सुधार सामूहिक रूप से यह संकेत देते हैं कि निर्णय-निर्माण की दक्षता सचिवालय सुधारों का एक केंद्रीय लक्ष्य बन चुकी है। अब मंत्रालय नागरिकों के अनुरोधों तथा आंतरिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के प्रति अधिक तीव्रता और प्रभावशीलता से प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो गए हैं।

 

डिजिटल परिवर्तन : -ऑफिस कार्यान्वयन एवं विश्लेषण

सचिवालय सुधार पहल का एक प्रमुख घटक ई-ऑफिस (e-Office) का कार्यान्वयन है, जो एक डिजिटल वर्कफ्लो प्रणाली है। इसका उद्देश्य फाइलों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करना, प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाना तथा पारदर्शिता को बढ़ाना है।

जनवरी 2026 में निर्मित कुल फाइलों में से 93.81% ई-फाइल (e-File) थीं, जबकि प्राप्त कुल पत्राचार में से 95.29% ई-रसीद (e-Receipt) के रूप में दर्ज किए गए। यह प्रशासनिक संचार और फाइल प्रबंधन में लगभग पूर्ण डिजिटल परिवर्तन को दर्शाता है।

कुल 65 मंत्रालयों एवं विभागों ने कम से कम 90% -फाइल अपनाने का लक्ष्य प्राप्त किया, जबकि 15 मंत्रालयों/विभागों ने 100% ई-रसीद अपनाने की उपलब्धि हासिल की। डिजिटल अपनाने का यह उच्च स्तर कागजरहित, दक्ष एवं पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

जनवरी 2026 में अंतर-मंत्रालयी फाइलों की आवाजाही केवल 4,752 फाइलों तक सीमित रही, जो यह संकेत देती है कि वर्कफ्लो को सुव्यवस्थित करने और प्रक्रियाओं के मानकीकरण से अनावश्यक भौतिक फाइल हस्तांतरण में कमी आई है तथा प्रशासनिक समन्वय में सुधार हुआ है।

ई-ऑफिस का कार्यान्वयन न केवल आंतरिक प्रक्रियाओं को तीव्र बनाता है, बल्कि बेहतर अभिलेख-संरक्षण, डेटा विश्लेषण तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी सहायक है। यह आधुनिक शासन की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।

 

नागरिक-केंद्रित शासन पर विशेष ध्यान

प्रशासनिक दक्षता से आगे बढ़ते हुए, रिपोर्ट उन पहलों पर भी प्रकाश डालती है जिनका सीधा प्रभाव नागरिक अनुभव और लोक सेवा वितरण पर पड़ता है।

  • फाइलों के लंबित मामलों में कमी और डिजिटल अपनाने में वृद्धि के परिणामस्वरूप नागरिकों को त्वरित शिकायत निवारण, समयबद्ध उत्तर तथा सरकारी कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता का लाभ प्राप्त हो रहा है।
  • 5 लाख से अधिक लोक शिकायतों तथा सांसद/राज्य संदर्भों के निस्तारण से यह स्पष्ट होता है कि सरकार नागरिकों के साथ सक्रिय संवाद बनाए हुए है और उनकी चिंताओं को केवल प्राप्त ही नहीं, बल्कि प्रभावी एवं कुशलतापूर्वक समाधान भी कर रही है।

ये उपाय शासन में उत्तरदायित्व और जवाबदेही के व्यापक संकल्प को दर्शाते हैं, जो नागरिक-केंद्रित प्रशासन के मूल सिद्धांत हैं।

 

सर्वोत्तम प्रथाएँ : सततता एवं दक्षता में नवाचार

रिपोर्ट में विशेष रूप से “वेस्ट टू वेल्थ” (अपशिष्ट से संपदा) पहल के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को रेखांकित किया गया है।

  • विभिन्न मंत्रालयों में कबाड़ से फर्नीचर और कलाकृतियों का निर्माण यह दर्शाता है कि प्रशासनिक सुधार केवल शासन प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें पर्यावरणीय जिम्मेदारी, सतत विकास और संसाधनों के रचनात्मक पुनः उपयोग को भी शामिल किया गया है।
  • ऐसी पहलें न केवल परिचालन दक्षता को बढ़ाती हैं, बल्कि नवाचार, कर्मचारी सहभागिता और मनोबल को भी प्रोत्साहित करती हैं। इस प्रकार नियमित प्रशासनिक कार्यों को सततता और उत्पादकता के अवसरों में परिवर्तित किया जा रहा है।
  • उदाहरण के तौर पर, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा बेंगलुरु स्थित नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ ने परित्यक्त सामग्रियों को उपयोगी फर्नीचर में बदलकर एक आदर्श प्रस्तुत किया है, जबकि रेल मंत्रालय ने रचनात्मक “वेस्ट टू आर्ट” स्थापनाओं का प्रदर्शन किया।

 

राजस्व विश्लेषण एवं वित्तीय प्रभाव

मासिक रिपोर्ट में स्वच्छता अभियान और कबाड़ निस्तारण से प्राप्त राजस्व का विस्तृत वित्तीय विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया है।

 

पैरामीटर

दिसम्बर 2024 – अगस्त 2025

दिसम्बर 2025 – जनवरी 2026

संचयी

अर्जित राजस्व (₹ करोड़)

2,364.05

200.21

4,405.28

 

  • ₹4,405.28 करोड़ का संचयी राजस्व अपशिष्ट प्रबंधन और अभिलेख निस्तारण पहलों की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करता है।
  • प्रशासनिक सुधारों से राजस्व सृजन यह सुनिश्चित करता है कि ये कार्यक्रम आत्मनिर्भर (Self-Sustaining) हों तथा कार्यालयीन अवसंरचना और नागरिक सेवाओं में सुधार हेतु पुनर्निवेश (Reinvestment) किया जा सके।

 

-गवर्नेंस एवं प्रशासनिक विश्लेषण को सुदृढ़ बनाना

  • रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि ई-ऑफिस के व्यापक अपनाने और डिजिटल एनालिटिक्स (विश्लेषणात्मक प्रणाली) ने पारंपरिक शासन प्रणाली को किस प्रकार परिवर्तित किया है।
  • डिजिटलीकरण से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में रियल-टाइम निगरानी, स्वचालित कार्यप्रवाह (ऑटोमेटेड वर्कफ्लो) और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  • सुव्यवस्थित अंतर-मंत्रालयी फाइल संचालन से नौकरशाही विलंब में कमी आती है, जबकि विश्लेषणात्मक तंत्र (एनालिटिक्स) प्रदर्शन, लंबित मामलों और दक्षता स्तरों के बारे में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • डीलियरिंग (Delayering) पहल और डिजिटल अपनाने के संयुक्त प्रभाव से त्वरित अनुमोदन, बेहतर समन्वय और डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण संभव हुआ है।

 

प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप

रिपोर्ट में उल्लिखित पहलें प्रशासनिक उत्कृष्टता के व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं।

  • स्वच्छता, डिजिटलीकरण, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन पर केंद्रित प्रयास सरकार के उस मिशन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य नौकरशाही का आधुनिकीकरण, भ्रष्टाचार में कमी और जवाबदेही में वृद्धि करना है।
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार और सतत विकास को अपनाकर सरकार सार्वजनिक प्रशासन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
  • ये सुधार एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसमें परिचालन दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और डिजिटल शासन को दीर्घकालिक प्रभाव के लिए एकीकृत किया गया है।

 

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

जनवरी 2026 के लिए सचिवालय सुधार मासिक रिपोर्ट का 27वाँ संस्करण कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:

  • यह पारदर्शी शासन की दिशा में स्वच्छता और प्रभावी अभिलेख प्रबंधन को आधारभूत कदम के रूप में रेखांकित करता है।
  • यह कबाड़ निस्तारण के माध्यम से राजस्व सृजन को उजागर करता है, जो सतत और आर्थिक रूप से उत्पादक प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
  • डिजिटलीकरण और ई-ऑफिस अपनाने से प्रौद्योगिकी-आधारित दक्षता और कागजरहित प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
  • फाइल लेन-देन स्तरों में कमी के माध्यम से निर्णय-निर्माण की दक्षता में सुधार हुआ है, जिससे नागरिकों को त्वरित सेवा वितरण सुनिश्चित होता है।
  • लोक शिकायत निवारण तथा सांसद/राज्य संदर्भों के निस्तारण जैसी नागरिक-केंद्रित पहलें जवाबदेह शासन को प्रतिबिंबित करती हैं।
  • वेस्ट-टू-वेल्थ और सततता संबंधी पहलें संसाधनों के रचनात्मक उपयोग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
  • इन सभी प्रयासों से स्पष्ट है कि प्रशासनिक सुधार केवल प्रक्रियागत परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि एक आधुनिक, पारदर्शी, उत्तरदायी और सतत शासन व्यवस्था की दिशा में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक हैं।
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