बंबई हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि लिंग परिवर्तन सर्जरी कराके महिला बनने वाला कोई ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की मांग कर सकता है।
न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल-न्यायाधीश पीठ ने सत्र न्यायालय के 5 अक्टूबर, 2021 के आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के नवंबर 2019 के फैसले को बरकरार रखा गया था जिसमें उसे रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को कायम रखा है और व्यक्ति को अलग रह रही पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है
न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि डीवी अधिनियम की धारा 2 (एफ) जो घरेलू संबंध को परिभाषित करती है, लिंग तटस्थ है और इसलिए इसमें व्यक्तियों को उनकी यौन वरीयताओं के बावजूद शामिल किया गया है।
इस अधिनियम का उद्देश्य हिंसा की शिकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। यह फैसला एक ट्रांसजेंडर महिला द्वारा अपने अलग रह रहे पति के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामले में आया है।