हसीना के जाने के बाद बीएनपी आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है

हसीना के जाने के बाद बीएनपी आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है

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द हिंदू: 24 अप्रैल 2025 को प्रकाशित:

 

समाचार में क्यों है?

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद, बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में आई लेकिन अब वह आंतरिक गुटबाजी, संघर्ष और हिंसा से बुरी तरह प्रभावित है। पार्टी के भीतर वर्चस्व को लेकर झगड़े और क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए हिंसक झड़पें हो रही हैं।

 

पृष्ठभूमि

BNP और अवामी लीग दशकों से प्रतिद्वंदी रहे हैं।

हसीना के जाने और अवामी लीग के कमजोर होने के बाद, बीएनपी को राजनीतिक बढ़त तो मिली, लेकिन अब पार्टी खुद ही आपसी टकरावों से जूझ रही है।

पहले बीएनपी बनाम अवामी लीग संघर्ष होते थे, अब बीएनपी बनाम बीएनपी गुट आम हो गए हैं।

 

प्रमुख घटनाएं

लाबलू मिया की हत्या: 5 अप्रैल को रंगपुर के बादरगंज में बीएनपी गुटों की झड़प में बीएनपी नेता की चाकू मारकर हत्या।

अन्य घटनाएं: दो दिन बाद लक्ष्मीपुर के रायपुर उपजिला में एक और झड़प, दो कार्यकर्ताओं की मौत।

 

आंकड़े:

मार्च 2025: 64 बीएनपी गुटीय संघर्षों में 17 मौतें (HRSS रिपोर्ट)।

जनवरी–मार्च 2025: 36 राजनीतिक हत्याएं, जिनमें से 24 बीएनपी के आंतरिक झगड़ों से जुड़ी थीं।

 

वर्तमान स्थिति

पार्टी नेतृत्व असहाय: कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की चेतावनियों के बावजूद हिंसा जारी।

साजिश का आरोप: पार्टी नेता शामा ओबैद ने आरोप लगाया कि अवामी लीग समर्थक बीएनपी में घुसपैठ करके अराजकता फैला रहे हैं।

राजनीतिक आह्वान: नैशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी ने मांग की कि केवल पार्टी से निष्कासन नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

कानून व्यवस्था की स्थिति

संयुक्त छापेमारी: 10–17 अप्रैल के बीच 390 अपराधी गिरफ्तार (ISPR रिपोर्ट)।

सरकार का रुख: गृहमंत्रालय के सलाहकार जहांगिर चौधरी ने कहा कि जो पुलिस अधिकारी नियंत्रण में विफल रहेंगे, उन पर कार्रवाई होगी।

NGO की आलोचना: मानवाधिकार संगठन MSF के प्रमुख सईदुर रहमान ने कहा कि सरकार इन झगड़ों को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर मान रही है और हस्तक्षेप नहीं कर रही।

 

मुख्य समस्याएं

हसीना के बाद नेतृत्व संकट और वर्चस्व की लड़ाई।

BNP में अनुशासन का अभाव।

राजनीति की जगह अब आर्थिक लाभ के लिए संघर्ष।

पुलिस की निष्क्रियता और असमंजस।

पार्टी के अंदर शिकायत समाधान प्रणाली की कमी।

 

प्रभाव

राजनीतिक अस्थिरता: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी विश्वसनीयता खो रही है।

जनता का मोहभंग: आम नागरिकों का राजनीतिक व्यवस्था से विश्वास उठ सकता है।

लोकतंत्र को खतरा: हिंसा और राजनीतिक विघटन लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकते हैं।

 

निष्कर्ष

हसीना सरकार के जाने के बाद बीएनपी को जो अवसर मिला, वह आंतरिक गुटबाजी, अनुशासनहीनता और हिंसक प्रवृत्तियों के कारण संकट में बदल गया। यदि बीएनपी ने कठोर और निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो पार्टी स्वयं के भीतर से टूटने की कगार पर पहुंच सकती है और देश को एक मज़बूत विपक्ष विहीन लोकतंत्र का सामना करना पड़ सकता है।

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