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Pariksha Kumari / परीक्षा कुमारी

परीक्षा कुमारी की टिप्पणी : तर्क से कुतर्क का फर्क

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कभी कभी किसी के उत्तर को सुनकर दिल बाग़-बाग़ हो उठता है और हम उछल पड़ते हैं, 'वाह ! कितना तर्क संगत और सटीक उत्तर है !!' अक्सर गोष्ठियों में वैचारिक मतभेद हो जाने पर वितर्क और कुतर्क का समावेश हो जाता है जिससे समय नष्ट होने के साथ साथ गोष्ठी की आत्मा का हनन भी हो जाता है | इतना कुछ बताने का हमारा आशय मात्र यह है कि किसी भी परीक्षा के सन्दर्भ में तर्क, वितर्क व कुतर्क महत्वहीन हैं | पूछे गये, प्रश ...read more

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संघर्ष को स्वीकारो सहर्ष - परीक्षा कुमारी

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कुछ लोगो के जीवन में बहुताधिक संघर्ष होते हैं, पारिवारिक, आर्थिक,स्वास्थ्य सम्बंधित, नौकरी व रोज़गार से जुड़े, संबंधो से उत्पन्न इत्यादि | यदि किसी व्यक्ति का संघर्ष मिल बाँट कर कम किया जा सके तो यह एक अत्यंत सुखद स्तिथि हो सकती है परन्तु आमतौर पर ऐसा नहीं होता | 'अपने दुःख आप ही ढ़ोने पड़ते हैं' | फिर ऐसी परिस्तिथि को क्यों न सहर्ष स्वीकार किया जाए ! यह बात कहने और सुनने में साधारण लगती है पर ...read more

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परीक्षा कुमारी का ‘स्वीकार वाद’

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हम अपनी समस्त जरूरतें अपनी पसंद से छाँट छाँट कर पूरी करते है| बहुधा अपनी नापसंद को मज़बूरी में विवशता वश स्वीकार करने के बाद समय के साथ उस वस्तु की गुणवत्ता को समझ कर हम उसे पूर्णत: अपना लेते है| हमारे चारों ओर का वातावरण हमें प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों रूप में प्रभावित करता है| दोस्त, दुश्मन, हमसफ़र, जानकार, यह सब हम स्वेच्छा से बनाते हैं| रिश्ते–नाते ईश्वर प्रदत्त हैं| उन्हें हम चाहकर भ ...read more

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अनुश्रवण, एक उत्प्रेरक

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बचपन में गुणा के सिध्दांत को समझाने और गुणा सिखाने के लिए पहाड़ों को याद कराया जाता था| बार बार दोहरा कर पहाड़ों को रट कर अगले दिन कक्षा में ऊंची आवाज़ में सुनाने की परम्परा सर्वम थी| कहना न होगा की बीच में अटक जाने पर पुनः प्रारम्भ से बोल कर लयबध्दता की आड़ में भूल का सुधार हो जाना एक सामान्य सी बात थी| अन्यथा गुरूजी, दण्ड स्वरूप, अगले दिन 3 बार पहाड़ा दोहराने को विवश कर देते थे| इस कठिन अभ्यास ...read more

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स्वयं को निखारें : परीक्षा टॉनिक अपनायें !

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'निखार', दृश्य एवं अदृश्य दो प्रकार का होता है | जब हम तन को निखारते हैं, वह हमारे बाहरी व्यक्तित्व को आकर्षक बनाकर हमारे अहम् को संतुष्ट करता है | कृत्रिम प्रसाधनों से लैस इस आधुनिक संक्रान्ति युग में नैसर्गिक निखार मानों लुप्त हो गया है क्योंकि सुन्दरता के पैमाने भी बदल रहे हैं | मन और मस्तिष्क का निखार अदृश्य होता है | यह जब प्राकर्तिक निखर के साथ संतुलन बैठाता है तो एक प्रखर व्यक्ति ...read more

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अभ्यास के आयाम

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परीक्षा कुमारी का कहना है कि 'पहले प्रयास, फिर अभ्यास' किसी भी लक्ष्य की पूर्ती के लिए निरंतर प्रयासरत होना पड़ता है | प्रयास अर्थात कोशिश अथवा प्रयत्न करना | अक्सर प्रयास करते समय कयास (अटकल) यानी 'Guess' लगाना पड़ता है | जब एक बार प्रयास को दिशा मिल जाती है, आपका लक्ष्य निर्धारित हो जाता है और प्रयास से अभ्यास की ओर कदम बढ़ने लगते हैं| यह एक कारगर शुरुआत है | अभ्यास किसका? कब? और कैसे? हर परीक्ष ...read more

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परीक्षा कुमारी की अभिप्रेरणा

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आपका मनोभाव आपके मनोबल का उद्गम स्थल है| यदि आप अपनी भावनाओं को सकारात्मक उर्जा देंगे तो आपके मनोबल का ग्राफ उर्ध्वगामी और अभिप्रेरक होगा| यदि भावना नकारात्मक हो तो मनोबल भी अधोगामी होकर अवसाद के क्षण पैदा करेगा | एक साधारण कैसे अपने मनोभावों का मूल्यांकन करें? वह किस नियमावली का पालन करे? वह किससे विमर्श करे? परीक्षा कुमारी के अनुसार इन सारे प्रश्न चिन्हों का मात्र एक ही उत्तर है| ' ...read more

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परीक्षा कुमारी और 'सुधारवाद'

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कमियाँ हमें उभारती हैं | अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारना एक आसान काम नहीं है | इस मुश्किल काम के दो पहलू हैं | पहला यह जानना की कमी क्या है और दूसरा यह की उसे सुधारने का मापदंड क्या होना चाहिए | किसे रोल मॉडल बनाएं ? किससे तुलना करें इत्यादि | असमान परिस्थितियों में अनगिनत विकल्प हो सकतें हैं, परन्तु परीक्षायें, परीक्षापत्र और परीक्षार्थियों के सन्दर्भ में यह मामला इतना जटिल नहीं ...read more

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समय दीक्षा

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आज का मुख्य विषय `समय दीक्षा` है | हम घंटे और मिनटों की जगह `सेकेन्ड्स` अर्थात 1/60 मिनट की बात करेंगें क्योंकि सरकारी परीक्षाओं में अधिकतर प्रश्नों का उत्तर सेकन्ड्स में देना होता है | अन्यथा पर्चा छूट जाता है आँकड़े बोलते हैं -- SSC और Banking की कई सारी परीक्षाओं में अभ्यर्थी सभी प्रश्नों को ध्यान से देख भी नही पाते क्योंकि ये अभ्यर्थी अपना ज्यादातर समय कन्फ्यूजन वाले प्रश्नों को हल करने मे ...read more

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परीक्षा कुमारी की चेतावनी

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सरकारी परीक्षाओं में अब सही और गलत की अपेक्षा,  सही में से गलत के अंकों का कुछ प्रतिशत घटाकर अन्तिम योग निकाला जाता है | इस प्रक्रिया को निगेटिव मार्किंग (Negative Marking) कहते हैं | ध्यान दें – तुक्का भिड़ाना आफत को न्योता देना है |  असमंजस (Doubtful) की स्थिति में उत्तर ना देना, गलत उत्तर देने की अपेक्षा कहीं अधिक बेहतर (श्रेष्ठ) है | तुक्का ना भिड़ायें  |  खुद को ना चिढ़ायें !! ...read more

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परीक्षा कुमारी और परिवर्तन प्रणाली

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अक्सर बहुचर्चित परीक्षाओं के विधान परिवर्तन होता देखा गया है। परिवर्तन, प्रगति की और बढ़ते कदमो की आहट है। परिवर्तन से घबराना और पीछे हट जाना हमारी दक्षता को चुनौती है। किसी भी प्रकार के परिवर्तन की सूचना sarkaripariksha.com आपको सही वक्त में दे देता है। आपको सचेत रहना है। बहुधा परीक्षाएँ रद्द हो जाती है या फिर उनका स्थानापन्न, नई तिथियाँ, नए मानदण्ड आदि सूचित हो जाते है। सतर्कता, कुशलता की जुड ...read more

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परीक्षा कुमारी का 'खोज सन्देश'

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एक परीक्षार्थी की आदत बन गयी थी, अपने आप को कोसते रहना | अपनी कमियों का दोष, अपने आप को देते रहना | स्वयं की निंदा करना अपने आत्मसम्मान का हनन है | मेरे अनुसार अगर 'कोसने' के बजाए स्वयं को 'खोजते' तो कहाँ से कहाँ पहुँच जाते | स्वयं की खोज से अपनी उभरती कमियों को पहचान कर उनको दूर करने के उपाय ढूँढना एक प्रेरक पहलू है | बात सरकारी परीक्षाओं की तैयारी और उनके प्रबंधन की करें तो sarkaripariksha.com एक सुलझा ह ...read more

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परीक्षा कुमारी का सुरक्षा कवच !

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परीक्षा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा भी अहम है। परीक्षार्थियों के लिए नींद और भोजन की उपेक्षा (लापरवाही) महंगी पड़ सकती है। क्योंकि अधूरी नींद में पढ़ा गया विषय कारगर नहीं होता। हमारे शरीर और मस्तिष्क को उचित आराम भी चाहिए। पेट की उथल-पुथल सँभालने के लिए आहार भी चाहिए। झपकी की थपकी को समझो, पाठ ही नहीं पेट भी पूजो।

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परीक्षा कुमारी का रिक्शा

परीक्षा कुमारी ने अपने ही ढंग से आम लोगों की राय, सरकारी नौकरी के प्रति जानने का बीड़ा उठाया | वह चल पड़ी किराये के रिक्शे पर, कुछ गली–कूचों की ओर ! प्रश्न था सरकारी नौकरी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? राय शुमारी में जो पक्ष उजागर हुए (बातें सामने आईं) उनमें सबसे प्रथम थी नौकरी की स्थिरता, फिर नौकरी से मिलने वाली सुविधाएँ, जैसे: स्वास्थ्य, शिक्षा, महंगाई भत्ता इत्यादि | इतनी महत्वपूर्ण नौक ...read more

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हमारी विशेषज्ञ परीक्षा कुमारी आपको सरकारी परीक्षाओं से सम्बंधित हर बारीकी से अवगत करायेंगी | क्या? क्यों? कब? कहाँ? कैसे? और किस तरह? आपका पता है –


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